101/2025, बाल कहानी- 14 जुलाई


बाल कहानी - बुद्धिमान मुर्गा
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  किसी जंगल में बहुत सारे पशु -पक्षी रहते थे। वे आपस में मिल-जुलकर रहते थे । सारे पशु-पक्षी एक साथ नदी में पानी पीने जाते। और खाली समय में वे नाचने-गाने में मग्न रहते। 
एक समय बरसात के मौसम में महीने भर लगातार वर्षा होती रही। कई दिनों तक सूरज नहीं निकलने से पशु-पक्षी परेशान हो गए। सभी ने मिलकर बैठक की। बैठक में यह निर्णय हुआ कि बारी-बारी से सारे पशु -पक्षी सूरज देवता के पास जायें और उनसे दर्शन लेने के लिए प्रार्थना करें। इस निर्णय पर सभी ने हामी भरी। सबसे पहले खरगोश की बारी आयी, फिर मोर, बन्दर, गौरिया, हिरन, लोमड़ी, कठफोड़वा, घुरड़ आदि गये, लेकिन सूरज देवता ने किसी की भी प्रार्थना नहीं सुनी। सभी पशु -पक्षी हताश हो गये। अब मुर्गे की बारी आयी। मुर्गा सूरज देवता के पास पहुँचा। उसने भी प्रार्थना की, लेकिन सूरज देवता ने उसकी एक न सुनी। मुर्गे ने थोड़ा बुद्धिमानी से काम लिया ।
उसने कहा, "सूरज देवता! अब मैं वापस कैसे आऊँ? आपके घर के आँगन में बिल्ली बैठी है। वह मुझे मारकर खा जायेगी। आप उसे डराकर भगा दें।" सूरज देवता बोले, "ठीक है।" वे अपने घर से बाहर निकले। उनके बाहर निकलते ही चारों ओर उजाला फैला गया और मुर्गे ने कुकडू-कू की आवाज लगायी। सारे पशु-पक्षी खुश होकर नाचने लगे। सूरज देवता ने खुश होकर मुर्गे के सिर पर लाल मुकुट लगा दिया।

#संस्कार_सन्देश -
कितना भी मुश्किल वक्त क्यों न आये, हमें घबराना नहीं चाहिए बल्कि सूझ-बूझ से काम लेना चाहिए।

कहानीकार-
#दमयन्ती_राणा (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी
कर्णप्रयाग, चमोली (उत्तराखण्ड)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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