106/2025, बाल कहानी- 19 जुलाई
बाल कहानी - पानी की आवश्यकता
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ऋतु खुश होकर गाना गाने लगी। आजकल वह बहुत खुश थी। खुशी के मारे वह फूली नहीं समा रही थी। तभी अचानक गले में कुछ जा फॅंसा। वह परेशान हो गई। खाॅंसने से उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे। शिवम ने उसे पीने के लिए पानी दिया। किसी तरह अपने को नियन्त्रित करके उसने पानी पिया। सामान्य होने पर वह फिर से खुल कर हॅंसने लगी।
शिवम् बोला, "अभी तक तुम्हारी जो हालत हो गई थी, मैं तो डर ही गया था। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। नहीं तो गले में खराश हो सकती है। हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। जिससे हम रोगग्रस्त हो सकते हैं।"
"अच्छा! ऋतु बोली।
"भरपूर मात्रा में पानी पीते रहने से शरीर के विषाक्त पदार्थ पसीने अथवा मल-मूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकल जाते हैं।" शिवम् कह रहा था।
"ध्यान रहे बरसात में गन्दे पानी से अनेक रोग हो जाते हैं। स्वच्छ पानी का उपयोग उपभोग करना चाहिए।"
यह सुनकर ऋतु ने शिवम का धन्यवाद किया।
उसने अनुभव किया कि वास्तव में हॅंसते-खेलते उसका गला लगने से इतनी परेशानी हुई।
पानी की कमी होने से हमारा शरीर कितना कष्ट झेलता होगा?
शायद इसीलिए कहा गया है -बिन पानी सब सून।
#संस्कार_सन्देश-
अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमें समय समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
कहानीकार-
श्रीमती #सरोज_डिमरी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा विकासखण्ड, कर्णप्रयाग
चमोली (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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