98/2025, बाल कहानी- 10 जुलाई
बाल कहानी - शिक्षक या साइंटिस्ट
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सुदीप को रात में एक सपना आया। उसने सपने में देखा कि दुनिया में सिर्फ और सिर्फ उसी का परिवार बचा है। बाकी सारे गायब हो गये। उसकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था कि उसे तो दुनिया की किसी भी चीज की जानकारी नहीं है। वह सिर्फ और सिर्फ उपलब्ध वस्तुओं और सामान का उपभोग करना ही जानता है।
वह अपने फोन पर कई प्रकार की सूचनाओं को देखा करता था और पढ़ता था। उनसे नयी जानकारी लेता था और खुश होता था। उसमें से कई छायाचित्र जिन्हें वह शेयर, फारवर्ड भी करता था। अब उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि उसे कुछ भी तो नहीं आ रहा है। उसे अब एहसास हुआ कि वह कहीं भी तो आत्मनिर्भर नहीं है। वह पूर्ण रूप से दूसरों के घर परिवार पर आश्रित है। मोबाइल, टेलीविजन सब कुछ के लिए दूसरों पर निर्भर है।
आज उसे बार-बार एक ही चीज याद आ रही थी कि शिक्षक बड़े या वैज्ञानिक। अब उसके मन में आया कि जो साइंटिस्ट हुए, उनके भी शिक्षक रहे हैं और अब वे नये -नये आविष्कार करते हुए स्वयं एक शिक्षक हैं। उन्हें भी तो किसी शिक्षक ने पढ़ाया होगा? वह बहुत जोर से चिल्लाया, "शिक्षक बड़ा है।"
तब तक उसकी नींद खुल गई। अब उसे एहसास हुआ कि अगर यदि वास्तव में ऐसा कुछ हो गया तो उसे तो न तो फोन बनाना आता है न इन्टरनेट की जानकारी है, न उसे प्राकृतिक संसाधनों, ईंधन, इलैक्ट्रिसिटी, कैमिस्ट्री अथवा न्यूक्लियर पावर प्लान्ट आदि की समझ है। ऊपर से उसका परिवार सोचता है कि सुदीप सब कुछ जानता है। वे अत्यधिक आत्मविश्वास से भरे रहते हैं।
उसको इन चीजों की जानकारी नहीं है न उसको आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति करने की कोई जानकारी है।
अब वह स्फूर्ति से उठा और जल्दी-जल्दी तैयार होकर अपना टिफिन उठाकर विद्यालय की ओर चला।
उसने अपना सपना गुरु जी को सुनाया। कक्षा में एक बार तो खामोशी छा गई, लेकिन गुरुजी ने उसके कई प्रश्नों के उत्तर दिये। कुछ बच्चे सन्तुष्ट हुए और कुछ अभी भी सोच रहे थे कि अगर यदि ऐसा हो तो क्या होगा?
गुरुजी ने कहा कि हमारे मन में जब समस्या जन्म लेती है तो हम स्वयं समाधान भी ढूँढते हैं।
सब बच्चों के मन में इस स्वप्न के एक प्रति रुझान जगी। वह सभी इस बारे में आत्म-चिन्तन करने लगे। तब गुरु जी ने कहा कि, "जो जिज्ञासा जगी है, यही तो आपको आगे बढ़ाने के लिए एक मार्ग प्रशस्त करती है ।
#संस्कार_सन्देश-
हमें हमेशा नयी-नयी जानकारियाँ सीखते रहना चाहिए और आपस में सकारात्मक बातचीत करते रहना चाहिए।
कहानीकार-
#सरोज_डिमरी (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा
कर्णप्रयाग, उत्तराखण्ड
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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