107/2025, बाल कहानी- 21 जुलाई


बाल कहानी - संक्रमित रोग
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रमेश और रानी शहर में रहते थे। उनकी एक बेटी थी, जिसका नाम था- नायरा। वह अपनी बेटी को बहुत ज्यादा प्यार करते थे और करते भी क्यों नहीं, आखिर उन्हें वह शादी के पाँच वर्ष के पश्चात बेटी रत्न के रूप में प्राप्त हुई थी। वह अपनी बेटी की सारी इच्छाएँ पूरी करते थे। वह कभी भी उसे किसी भी इच्छा के लिए मना नहीं करते थे, जबकि रमेश की माताजी सदैव रमेश और रानी को समझाती थी कि, "वह अपनी बेटी- जिसका नाम नायरा था, किसी भी इच्छा के लिए चाहे वह जायज हो या नाजायज हो, सभी को पूरा करना गलत है।" दादी नायरा को भी सदैव समझाया करती थी कि, "उसे उसके मम्मी-पापा उसे बहुत प्यार करते हैं लेकिन उसे इस बात का गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए।" नायरा को दादी की यह बात पसन्द नहीं आती थी। वह दादी को कह देती, "दादी! मुझे कोई किसी भी बात के लिए मना करे, मुझे पसन्द नहीं, आप मुझे मना मत किया करिए।" 
एक दिन नायरा अपने मम्मी-पापा और दादी के साथ घूमने बाहर गयी। वहाँ पर मेला लगा हुआ था। वह मेले की सारी चीजें खाना चाहती थी और सारी चीजें अपने मम्मी-पापा से जिद करके खाने लगी। बेटी के प्यार और दुलार ने नायरा को किसी भी चीज के लिए मना नहीं किया। खूब मस्ती के बाद वे लोग घर आ गये। 
अचानक रात को नायरा को उल्टी और दस्त होने लगे। रमेश उसे पास के अस्पताल में लेकर गये, लेकिन डॉक्टर ने बताया कि, "इसे डायरिया हो गया है। उसे कुछ दिन अस्पताल में रहना पड़ेगा।" नायरा को ग्लूकोज की बोतल लगानी पड़ी, क्योंकि उसके शरीर में पानी की कमी हो गई थी। 
कुछ दिनों के पश्चात जब वह ठीक होकर घर आयी तो उसकी दादी की बात समझ में आई कि हमें बाजार की गन्दी चीजें नहीं खानी चाहिए। दादी ने रमेश और रानी को भी समझाया और कहा, "देखो, मैं कोई नायरा की दुश्मन थोड़े ही हूँ, जो उसे बाहर की चीजें खानें को मना करती हूँ।" अब रमेश और रानी को भी अपनी गलती का एहसास हो चुका था। वे जान चुके थे कि प्यार का मतलब यह नहीं है कि किसी की भी गलत बात को मान लिया जाय।
नायरा ने भी दादी से वादा किया और कहा कि, "आजकल संक्रमण रोग बहुत फैला हुआ है, तो हमें गन्दा पानी, खुली हुई चीजों आदि को नहीं खाना चाहिए।" उसने वादा किया कि, "आज से वह इस बात का ख्याल रखेगी और दूसरों को भी समझायेगी।"

#संस्कार_सन्देश -
सच! हमें बाहर की खुली चीजों और गन्दे प्रदूषित पानी आदि से बचना चाहिए। घर में भी साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए।

कहानीकार-
अंजनी अग्रवाल (स०अ०)
उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरुआ, सरसौल, कानपुर नगर (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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