117/2025, बाल कहानी- 01 जुलाई
बाल कहानी- परिवारिक विघटन
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एक गाँव में एक परिवार में सभी लोग बहुत अच्छे से रहते थे। उनका जीवन खुशियों से बीत रहा था। एक बार उनके घर एक मेहमान आया। उसने कुछ दिन वहीं रहने की बात कही। परिवार के सभी लोगों ने कहा, "ठीक है, रुक जाओ!" वह वहीं रुक गया। उसने एक सप्ताह तक किसी को कुछ नहीं कहा। अगले सप्ताह उसने परिवार के लोगों से एक-दूसरे की बुराई करना शुरू कर दिया। घर में एक बुजुर्ग व्यक्ति था। वह कुछ दिनों से बीमारी था इसलिए वह कहीं आने-जाने में असमर्थ था। वह सब कुछ सुनता था, लेकिन क्या करे? उसका क्रोध बढ़ता जा रहा था, पर बीमारी के कारण वह उसे कुछ नहीं कहता था। नवान्तुक उस परिवार में जहर घोल रहा था। इस तरह पन्द्रह दिन हो गये थे, धीरे-धीरे परिवार के सब लोगों में अनबन होना शुरू हो गया था। उस आदमी की बातों में आकर परिवार बिखर रहा था। उस आदमी ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। परिवार में अनबन होना शुरू हो गया था। परिवार के लोगों ने उस आदमी की बातों में आकर एक-दूसरे की बुराई करना शुरू करदी थी। अब स्थिति लड़ाई-झगड़े की नौबत तक आ गई थी। उस बुजुर्ग व्यक्ति को बहुत गुस्सा आ रहा था, अब वह कितने दिनों तक चुप रहता?
उसने एक दिन सभी लोगों को अपने पास बुलाया और समझाया। फिर उस आदमी पर अपना सारा गुबार निकाल दिया और बहुत डाँटा और उसे घर से जाने को कहा। सभी लोग उस आदमी की चाल को समझ गये। सभी ने उस आदमी को घर से जाने को कहा। सभी लोगों ने एक-दूसरे को समझा और फिर से उनका परिवार खुशी से रहने लगा। उन्होंने अपने घर के मुखिया उस बुजुर्ग व्यक्ति से क्षमा माँगी। सभी ने अपनी-अपनी गलतियों को स्वीकार किया।
#संस्कार_सन्देश -
किसी दूसरे ब्यक्ति को अपने घर में अधिक दिनों तक न रखें और उसकी बातों में आकर परिवार में अशान्ति पैदा न करें। परिवार टूटने का कारण कोई बाहर का ब्यक्ति ही होता है।
कहानीकार-
#प्रेमलाल_किशन (शिक्षक)
शा० प्रा० शाला बुढ़नपुर,
संकुल केन्द्र- गहरीनमुड़ा,
विकास खण्ड व जिला-सक्ती, छत्तीसगढ़
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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