२७६~ शंकर सिंह अधिकारी राजकीय प्राथमिक विद्यालय गड्यूडा नवीन, पाटी, चम्पावत, उत्तराखंड

🌹🏅अनमोल रत्न🏅🌹
मित्रों आज हम आपका परिचय मिशन शिक्षण संवाद के माध्यम से उत्तराखंड से अनमोल रत्न शिक्षक साथी भाई शंकर सिंह जी से करा रहे है। जिन्होंने अपनी सकारात्मक सोच और तन, मन, धन के समर्पण से अपने विद्यालय को समाज और शासन के लिए आकर्षण और विश्वास का केन्द्र बना दिया। इसीलिए आज आपका विद्यालय किसी गाँव अथवा क्षेत्र विशेष के लिए अनुकरणीय न होकर राज्य की सीमाओं से बाहर भी अपनी प्रेरक शक्ति का परिचय करा रहा है।
आइये देखते हैं आपके द्वारा किए गये प्रेरक और अनुकरणीय प्रयासों को:-
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मैं शंकर सिंह अधिकारी राजकीय प्राथमिक विद्यालय गड्यूडा नवीन में 11 अक्टूबर 2012 को नियुक्त हुआ जो उत्तराखण्ड के जनपद- चम्पावत में पाटी ब्लाक के अति दुर्गम क्षेत्र में स्थित है। नियुक्ति मिलते ही मुझे प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी मिली। अति दुर्गम क्षेत्र में स्थित विद्यालय में काम करना एक चुनौती के रूप में जिम्मेदारी लेना था परन्तु वर्ष- 2001 से 2012 तक अपने गांव के विद्यालय में शिक्षा मित्र के रूप में काम करना मेरे लिए बहुत ही अनुभव भरा था। जिसके आधार पर मैंने अपने नए विद्यालय के लिए एक प्लान तैयार किया। सर्वप्रथम अभिभावकों से संपर्क करना उनको शिक्षा के महत्व और इसके दूरगामी परिणाम को समझाना था। धीरे-धीरे अभिभावकों से संपर्क और उनके नौनिहालों से अपनापन और लगाव बढ़ता गया। धीरे-धीरे बच्चों का समय से नियमित स्कूल आना शुरू हुआ। उनके अभिभावक उनको स्कूल तक पहुंचा जाते थे और छुट्टी के समय लेने आते थे। मैंने प्रतिमाह विद्यालय प्रबंधन समिति और अभिभावकों की बैठक में बुलाई जिसमें लोगों ने प्रतिभाग किया। गांव के कुछ बच्चे अन्य विद्यालयों में जाते थे जिन्हें अपने विद्यालय में नामांकित करवाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। मैंने योजनाबद्ध तरीके से विद्यालय में काम करना शुरू किया नियमित समय के अलावा सायंकालीन कक्षाओं का संचालन एवं सामुदायिक शिक्षकों की नियुक्ति मेरे द्वारा की गई। जिससे समुदाय द्वारा मेरे कार्यों पर विश्वास किया जाने लगा। गरीबी के कारण बच्चे पढ़ने लिखने की सामग्री के अभाव से संकोच ग्रस्त थे। अतः मैंने अपनी ओर से उन्हें लेखन सामग्री प्रदान करनी शुरू की जिससे उनमें पढ़ने के प्रति विश्वास जगने लगा।
नामांकन बढ़ाने के लिए मैंने घर-घर संपर्क किया। जिसका नतीजा सकारात्मक रहा तथा आज छात्र संख्या 22 से बढ़कर 62 हो गयी है। छात्र संख्या बढ़ने के साथ-साथ एक ग्रामीण महिला को भोजन माता के रूप में रोजगार भी मिला छात्र संख्या बढ़ने के साथ उनकी व्यवस्था करना भी जरूरी था इसलिए दो सामुदायिक शिक्षकों को शिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार आज तक रखा गया है जिनका मानदेय स्वयं मेरे द्वारा वहन किया जाता है।

24 अप्रैल-2016 को बेटी के पैदा होने की खुशी में मैंने अपने वेतन का 10% हिस्सा स्कूल में दान देना सुनिश्चित किया जिससे सामुदायिक शिक्षकों का मानदेय तथा गरीब बच्चों हेतु लेखन सामग्री आदि शामिल है।

अप्रैल 2016 में सभी 53 बच्चों को मेरे द्वारा सजिल्द कॉपी, पेन, पेंसिल, रबर आदि निशुल्क प्रदान किए गए तथा 11 अक्टूबर-2017 को विद्यालय में 5 वर्ष की सेवा पूरी होने पर समरसता के लिए प्रीतिभोज का आयोजन किया गया तथा सभी 64 बच्चों को जूते मोजे अपनी ओर से दिए गए।




जिला पंचायत अध्यक्ष चंपावत श्रीमान खुशाल सिंह अधिकारी द्वारा विद्यालय की व्यवस्थाओं से खुश होकर दो कंप्यूटर और छोटे बच्चों के बैठने हेतु कुर्सी मेज तथा चारदीवारी के लिए ₹300000.00 दिए गए।
इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की टीम की डॉक्टर मनीषा कायथ द्वारा वाटर फिल्टर तथा मेरे द्वारा आग्रह करने पर ग्राम सभा के सरपंच श्रीमान नवीन राम द्वारा मुख्य गेट से प्रत्येक कक्षा कक्ष के दरवाजे, किचन एरिया तथा टॉयलेट तक सीसी मार्ग बनवाया गया।
विद्यालय प्रांगण को बढ़ाने के लिए मेरे आग्रह करने पर ग्रामीणों द्वारा 4 नाली भूमि को विद्यालय को दान दी गयी जिससे फील्ड का विस्तार किया गया तथा किचन गार्डन के लिए अतिरिक्त जमीन उपलब्ध हो पाई।
विद्यालय विकास के लिए समुदाय की सहभागिता की आवश्यकता को समझ कर उनका सहयोग हर संभव लिया जाता है विभिन्न कार्यक्रमों राष्ट्रीय पर्वों आदि में ग्रामीणों से सहयोग लेने के साथ-साथ किचन गार्डन के निर्माण में किचन गार्डन के लिए खाद देने में, निराई गुड़ाई करने आदि में सहयोग लिया जाता है।
विद्यालय में प्रतिवर्ष बाल संसद का गठन किया जाता है जिससे विद्यालय के कार्यों के निष्पादन में सहयोग मिलता है तथा बच्चों में विभिन्न आदतों का विकास होता है बाल संसद के सदस्यों द्वारा पुस्तकालय कालांश में पुस्तकों के लेन-देन में, एमडीएम के दौरान हाथ धोने में मदद करना, छोटे बच्चों को बैठाना, स्वच्छता समिति द्वारा परिसर टॉयलेट आदि की साफ-सफाई देखना, अनुशासन समिति द्वारा अनुशासन बनाए रखने में मदद करना तथा प्रार्थना सभा संचालन, समय से पीरियड की घंटी बजाना, आपसी साफ सफाई की जांच आदि कार्य अध्यापकों की देखरेख में किए जाते हैं।
पठन-पाठन में आईसीटी का आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जाता है कंप्यूटर लैपटॉप मोबाइल आदि द्वारा विषय गत जानकारी को इंटरनेट से डाउनलोड करके बच्चों को बताया जाता है जिससे सीखने सिखाने में बहुत मदद मिलती है और बच्चे रुचि पूर्वक सीखते हैं।
इस वर्ष उपनिदेशक श्रीमान रावत जी जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमान सत्यनारायण जी डाइट प्राचार्य श्रीमान शाक्य जी उप शिक्षा अधिकारी श्रीमान हरेंद्र शाह जी आदि द्वारा जनवरी में विद्यालय का निरीक्षण किया गया तथा विद्यालय की व्यवस्थाओं को देख कर प्रसन्नता जताई इसके अलावा उपनिदेशक श्रीमान वी के ढोंढियाल (प्रमुख सीमेट) ने भी विद्यालय का निरीक्षण किया तथा प्रसन्नता जताई।
विगत माह दूरदर्शन द्वारा विद्यालय के स्वच्छता कार्यक्रमों को चैनल में स्थान देना विद्यालय के लिए गौरव का विषय है।
विद्यालय को जनपद में *स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय* के तहत वर्ष 2017-18 का प्रथम पुरस्कार प्राप्त होना विद्यालय की उपलब्धि है।
इसके लिए मेरे द्वारा अपने खर्चे से प्रत्येक कक्षा- कक्ष, किचन एरिया, टॉयलेट एरिया में कूड़ादान की व्यवस्था, प्रत्येक दरवाजे में पर्दे, पायदान की व्यवस्था, हैंडवाशिंग प्वाइंट, कम्पोस्ट पिट, डिस्पोज पिट, भट्टी, लीच पिट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंक, प्रतिदिन हाथ धोने के लिए साबुन की व्यवस्था आदि की गई है।
परिसर को पूरी तरह से बंद करने के लिए गेट तथा चहारदीवारी की 6 ब्रेस्ट वाल (लगभग 50 घन मीटर) अपने खर्चे से बनाई हैं।

*प्रेरित कर प्रस्तुति व संकलन📝✏के लिये मिशन शिक्षण संवाद परिवार की ओर से राज्य संयोजक लक्ष्मण सिह मेहता जी का हार्दिक आभार व धन्यवाद*

नोट: आप अपने मिशन परिवार में शामिल होने, आदर्श विद्यालय का विवरण भेजने तथा सहयोग व सुझाव को अपने जनपद सहयोगियों को अथवा मिशन शिक्षण संवाद के वाट्सअप नम्बर-9458278429 और ई-मेल shikshansamvad@gmail.com पर भेज सकते हैं।

निवेदक: विमल कुमार
17-11- 2018

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