धरती मैया
बुला रही धरती मैया,
हे मानव मुझे बचा लेना।
सूख रही मेरी हरियाली,
पौधे नए लगा देना।
आज सभी ये प्रण ले लो,
अब हर दिन मेरा बना देना।
नदियों के कल- कल को
फिर से तुम लौटा देना।
कचरे से जो मुझे भरे हो
फिर से स्वच्छ बना देना।
नदी, नाले, पेड़- पौधों से
मुझको पुनः सजा देना।
पेड़ लगाओ मुझे बचाओ
साथ में खुद को पा लेना।
प्रकृति की गोदी में खेलो तुम
मुझको पुनः खिला देना।
इतराऊँ मै धानी चूनर में
बस अब ये फर्ज निभा देना।
मैं सदियों से सबकी पालक
मुझको माँ सा बना देना।
बुला रही धरती मैया
हे मानव मुझे बचा लेना।
प्रेम से फिर मुस्काऊँ मैं
मुझे हरा-भरा बना देना।
रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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