70/2025, बाल कहानी- 24 अप्रैल


बाल कहानी - गाँव की तकदीर
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कहते हैं कि अकेला चना भाँड नहीं फोड़ता, लेकिन यहाँ एक सरपंच ने अपने गाँव का नक्शा ही बदल डाला। आइये, जानते हैं कैसे?
ये कहानी है राजस्थान के पिपलांत्री गाँव की, जहाँ दुनियाँ की सबसे बड़ी संगमरमर की खानें हैं। सन् 2005 में बड़े-बड़े बिजनेसमैन उस गाँव की जमीन खरीदते और वहाँ के पेड़ कटवाकर पत्थर निकालकर अपना व्यापार करते। देखते ही देखते वहाँ के सारे पेड़ काट दिए गये, जिसकी वजह से उस गाँव में पानी की कमी होने लगी। कुछ ही दिनों बाद पीने के लिए भी पानी नहीं मिल रहा था। संगमरमर निकलने की वजह से पानी का तल नौ सौ फीट नीचे चला गया। दूर तक जाकर पीने का पानी लाना पड़ता। उस गाँव का सरपंच श्याम सुन्दर पालीवाल दिन रात यही सोचता कि गाँव में कैसे पानी आए? गर्मी और पानी की कमी की वजह से सरपंच की बेटी किरण का देहान्त हो गया। सरपंच बहुत बुरी तरह टूट गया। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी, अपनी बेटी की याद में सरपंच ने एक सौ ग्यारह पेड़ लगाये और उनकी देख-भाल अपने बच्चे की तरह की, अब तो उसके इस काम में गाँव के लोग भी उसकी मदद करने लगे। 
अब तो उस गाँव का ये नियम बन गया, जिसके भी घर बेटी होगी, वो एक सौ ग्यारह पेड़ लगायेगा। देखते ही देखते एक बन्जर और सूखा गाँव हरियाली से लहलहा उठा। जिसके भी घर में बेटी होती, सभी गाँव के लोग मिलकर पेड़ लगाते और इक्कीस सौ रुपए भी जमा करते और उस नवजन्मी बच्ची के पिता से दस हजार रुपए लेकर कुल इकतीस हजार रुपए पन्द्रह साल के लिए उस बेटी के नाम एफ० डी० बना देते।जिससे उसका भविष्य भी सुरक्षित रह सके। 
इसी प्रकार यदि उस गाँव का कोई व्यक्ति दुनिया छोड़कर जाता, उसकी याद में ग्यारह पेड़ लगाते हैं। यदि रक्षाबन्धन का त्योहार देखना है तो पिपलांत्री गाँव में जाकर देखिए, जहाँ की बेटियाँ उन एक सौ ग्यारह पेड़ों में राखियाँ बाँधती हैं। धन्य है, हमारा देश जहाँ आज भी सभ्यता और संस्कृति जिन्दा है। हमें गर्व है कि हम भारत देश की सन्तान हैं, जहाँ बेटियों को इतना मान दिया जाता है।

#संस्कार_सन्देश -
गर्मी को देखते हुए हम सबको पेड़ लगाने चाहिए। पेड़ है तो जल है और जल है तो जीवन है।

कहानीकार-
#भावना_वर्मा (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय शंकरगढ़ 
बम्हौरी, सुहागी, बँगरा (झाँसी)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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