74/2025, बाल कहानी- 29 अप्रैल
बाल कहानी - जादुई मछली
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रेतीला एक मछुआरा था। वह रोज समुद के किनारे मछली पकड़ने जाता था। उन्हीं मछलियों को बेचकर अपना और अपने परिवार का गुजारा करता था।
एक दिन रेतीला की पत्नी की तबियत बहुत खराब हो गई। रेतीले को अपनी पत्नी को डॉक्टर को दिखने के लिए बहुत सारे पैसे चाहिए थे। तो वह सुबह बहुत जल्दी उठकर समुद्र किनारे पहुँच गया। उस दिन वह समुद्र के किनारे पहुँचा ही था, तभी अचानक बहुत तेज तूफान आ गया। सब लोग उसे वहाँ से जाने के लिए कहने लगे लेकिन रेतीला ने उन सबकी बात नहीं मानी। वह समुद्र के बीच में जाकर मछलियाँ पकड़ने लगा। साथ ही सोच रहा था, "आज मुझे अपनी पत्नी को डॉक्टर के पास अवश्य लेकर जाना है।" उसने अपनी जान की परवाह नहीं की और मछली पकड़ने में लगा रहा।
एक दम से एक बड़ी सी लहर आयी और उस मछुआरे को बहा ले गयी। जब बहुत रात हो गई और रेतीला घर नहीं पहुँचा तो उसकी पत्नी को बहुत चिन्ता हुई।
वह अपने पाँच साल के बेटे के साथ समुद्र के पास गयी लेकिन कुछ भी नहीं पता चला। ऐसे ही कुछ समय इन्तजार में बीत गया और रेतीला का कुछ पता नहीं चला। अब खाने के लाले पड़ गए। दिन पर दिन रेतीला की पत्नी की तबियत और खराब होने लगी। रेतीले के छोटे से बेटे ने समुद्र के किनारे मछली पकड़ने का कार्य प्रारम्भ कर दिया। वह रोज मछली पकड़ता और उन्हें बाजार में बेचकर पैसा कमाता और उन पैसों से अपनी माँ इलाज करवाता। एक दिन वह एक बहुत बड़ी मछली लेकर आया और उसे एक सेठ को बेच दिया।
सेठ ने घर जाकर उस मछली को एक किनारे रख दिया। अचानक उसके बेटे को चोट लग गई और खून बहने लगा। बहते-बहते खून की कुछ बूंदें उस मछली तक पहुँच गयीं, मछली जिन्दा हो गई और मछली ने उस खून को चाट लिया और उस सेठ के बेटे का खून बहना बन्द हो गया। सेठ को बहुत आश्चर्य हुआ। कई और प्रयोग किए, देखा कि ये तो कोई साधारण मछली नहीं बल्कि ये जादुई मछली है। बस क्या था! सेठ ने उस रेतीला के बेटे को बुलाया और बहुत सारा धन दिया। तब रेतीले के बेटे ने अपनी माँ का इलाज करवाया। वह शीघ्र ही स्वस्थ हो गई।
#संस्कार_सन्देश -
हमें अपनी जान की परवाह किए बिना कोई कार्य लापरवाही से नहीं करना चाहिए साथ ही हमें आवश्यक कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
कहानीकार-
#अंजनी_अग्रवाल (स०अ०)
उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरुआ, सरसौल, कानपुर नगर
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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