विश्व पुस्तक दिवस
पुस्तक वही जो ग्रंथ बन जाये,
पृष्ठों पर अंकित शब्द अमृत बन जायें,
सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् हो पृष्ठभूमि,
पुस्तक ज्ञान के तप से तपोभूमि बन जाये।
पुस्तक एक सबक बन जाये,
पुस्तक एक सीख दे जाये,
हर कोई पढ़ने को लालायित हो जाये,
पढ़कर मानो पावन गंगा में स्नान हो जाये।
शब्दों से निकली ध्वनि पहुँचेरूह तक,
पहुँचे दिल की धड़कन तक,
साँसों में हो उसका ही गुंजन,
बनकर सरगम पहुँचेमानस पटल तक।
सोते-जागते, ख्यालों-ख्वाबों में,
हर पहर, हर दिशा में,
धरती-अंबर में, हों महल पुस्तकों के,
ले जायें जो सत्य, सनातन, सतयुग की ओर।।
पुस्तक अहिल्या बन जाए,
छुयें श्री राम और वह पावन हो जाए,
बस जाए हनुमत के हृदय में,
पुस्तक कृतार्थ हो जाए।।
रचयिता
अर्चना गुप्ता,
प्रभारी अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजौरा,
विकास खण्ड-बंगरा,
जिला-झाँसी।

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