54/2025, बाल कहानी- 02 अप्रैल


बाल कहानी - जागरूकता
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राकेश शहर में प्राइवेट जॉब करता था, जबकि राकेश का परिवार एक छोटे से गाँव में रहता था। परिवार में उसके मम्मी-पापा, पत्नी और बच्चे थे। राकेश की दो बेटियाँ थीं- रीना और मीना। दोनों ही बहुत होशियार थीं। दोनों दसवीं की परीक्षा दे रही थीं।
स्कूल से लौटकर वह अपनी दादी को सारी दिनचर्या बताती थी।
रीना और मीना की दादी बहुत ही सरल स्वभाव की थी। वह हमेशा दूसरों की मदद को तत्पर रहती थी। 
रीना और मीना ने आज अपने विद्यालय की दिनचर्या दादी को बतायी। रीना बोली, "दादी! आपको पता है, आज हमारे विद्यालय में बाहर से कुछ लोग आये थे। उन्होंने हमारे विद्यालय में साइबर ठगी के बारे में सब को जागरूक किया।"
दादी, "बेटा! यह साइबर ठगी क्या होती?"
"दादी! आजकल लोग फोन कॉल के माध्यम से लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं, उनके पैसे हड़प लेते हैं। सरल स्वभाव के लोग उनकी बातों में आ जाते हैं।"
"तो वे उनसे पैसों की ठगी कर लेते हैं?" दादी आश्चर्यचकित हो बोली।
मीना, "हाँ, दादी! दीदी बिल्कुल ठीक कह रही है। हमें साइबर ठगी के बारे में जागरूक होना पड़ेगा और सभी को बताना पड़ेगा।"
दादी, "बेटा वह कैसे?"
मीना, "जब फोन पर कोई आपसे अपने सम्बन्धी के एक्सीडेंट या फिर गिरफ्तार होने के बात करें और पैसों की माँग करे तो वह साइबर ठगी करता है।"
दादी, "अच्छा हुआ बेटा! तुमने मुझे जानकारी दे दी।.. लेकिन बेटा! इसकी शिकायत कहाँ की जाए?"
रीता, "हाँ, दादी! साइबर ठगी की सूचना 1930 नम्बर पर करते हैं।"
रीता और मीना इतना कहकर अपनी सहेलियों के साथ खेलने चली गयीं।
तभी मोबाइल के फोन की घण्टी बजती है और फोन रीता की माँ उठाती है।
फोन पर-, "आप राकेश की पत्नी बोल रही हैं?...आपके पति का एक्सीडेन्ट हो गया है, वह अस्पताल में भर्ती हैं। मेरे बताए नम्बर पर तुरन्त पचास हजार रुपये भेज दें, जिससे उनका इलाज हो सके।"
यह सुनकर रीना की माँ तुरन्त घबरा जाती है और रोने लगती है। पास में बैठी दादी फोन लेकर जब बात करती हैं तो वह वही बात है दादी से भी कहता है। दादी को तुरन्त रीना और मीना की बात याद आ जाती है। वह सब समझ जाती हैं और वह उससे ऊँचे स्वर में कहती है कि, "मैं अभी तुम्हारी शिकायत 1930 पर करती हूँ।" तभी दूसरी तरफ से तुरन्त ही फोन कट जाता है।
जब रीना और मीना वापस आती है तो दादी उन्हें सारी बात बताती हैं और जागरूक करने के लिए 'धन्यवाद' देती हैं। वे कहती हैं, "आज तुम्हारी जागरूकता के कारण अपना परिवार साइबर ठगी का शिकार होने से बच गया।" दादी उनसे कहती है कि, "यह बात तुम्हें सारे गाँव में बताना चाहिए, जिससे सभी लोग जागरूक हो जाएँ।"

#संस्कार_सन्देश -
हम जागरूक होकर साइबर ठगी से बच सकते हैं और यह जानकारी हमें सभी को बतानी चाहिए।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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