63/2025, बाल कहानी - 15 अप्रैल


बाल कहानी - अपनों की डाँट
----------------------

बाल कहानी की सभी वीडियो देखने हेतु यूट्यूब प्लेलिस्ट को क्लिक करें 👇
https://www.youtube.com/playlist?list=PLS5lINLYuFNL-ILPa3x56T96RGBm_-_z_

सूरज की दो बेटियाँ थी- सीमा और राधिका। दोनों बड़े नटखट स्वभाव की थी। सूरज प्राइवेट जॉब करता था । उसकी पत्नी मीना घर का काम का सँभालती थी। घर पर सूरज की माँ और पिताजी भी साथ रहते थे। राधिका और सीमा सभी की लाडली थी।
दोनों बहनें नटखट स्वभाव होने के साथ-साथ पढ़ाई में भी बहुत होशियार थी। दोनों एक ही कक्षा में साथ-साथ पढ़ती थीं। मीना सभी का बहुत अच्छे से ख्याल रखती थी। समय पर सबको खाना देती और उनकी देख-भाल भी करती थी।
राधिका और सीमा अपनी माँ से रोज तरह-तरह के व्यंजन बनाने की जिद करती थीं। साथ ही साथ आए दिन बाहर की चीजों को खाया करती थी और अपने पिता से भी बाहर का खाना लाने की जिद करती थीं। उनकी इसी आदतों से उनकी माँ बहुत परेशान हो गई थी।
इसी आदत के कारण मीना दोनों बच्चियों को बहुत समझाती कि, "बाहर की चीजें शरीर को नुकसान पहुँचाती हैं। हमें घर का बना खाना खाना चाहिए। वह ज्यादा पौष्टिक होता है।" मीना उन्हें समझाती कि, "बाहर का खाना खाने से आप बीमार हो जाओगे।" पर दोनों बच्चियाँ उनकी एक न मानतीं।
इस कारण उनकी माँ उन्हें अक्सर डाँटती थी, जिस कारण दोनों बहने माँ की डाँट सुनकर बुरा मान जाती थीं।
दादी बाबा भी उन्हें समझाती कि, "अपनों की डाँट में भलाई छुपी होती है, पर वह उनकी बात भी न मानतीं।
धीरे-धीरे वे मन में माँ से नफरत करने लगी थीं।
एक दिन की बात है, दोनों बहनें स्कूल से लौट रही थीं और रास्ते पर उन्होंने बाहर से कुछ लेकर खा लिया। घर आते ही उनके पेट में जोर-जोर से दर्द और उल्टियाँ होने लगीं, माँ उन्हें तुरन्त डॉक्टर के पास ले गयी। 
डॉक्टर ने उनको दवा दी और बताया कि, "उन्हें फूड प्वाइजनिंग हो गई है। जब हम बाहर का खाना खाते हैं तो हमें अक्सर इस तरह की बीमारियाँ हो जाती हैं।" राधिका और सीमा को तुरन्त अपनी माँ की याद आ गई कि माँ उन्हें बाहर का खाना खाने से क्यों मना करती थी।
जब राधिका और सीमा को अस्पताल से छुट्टी मिली और वे घर आयीं तो सबसे पहले उन्होंने अपनी माँ से माफी माँगी।
अब राधिका और सीमा को अपनी गलती का एहसास हो गया था। वह समझ गई थी कि बड़ों की डाँट में भी उनका भलाई छुपी होती है, साथ ही साथ उन्होंने अपनी इस आदत के लिए क्षमा माँगी और आगे अपनी इस आदत को बदलने का वादा किया। उन्होंने कहा कि, "अब वे घर का बना ही पौष्टिक खाना खाया करेंगी।"

#संस्कार_सन्देश -
हमें बड़ों का कहना मानना चाहिए। उनकी डाँट में भी हमारी भलाई ही छुपी होती है। साथ ही हमें घर का बना पौष्टिक खाना खाना चाहिए।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

Comments

Total Pageviews