68/2025, बाल कहानी- 22 अप्रैल


बाल कहानी - आज्ञा पालन और विश्वास
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मोहन सिंह एक छोटे से गाँव में रहता था। वह खेती-बाड़ी का काम करता था। उसके पास दस बीघा जमीन थी, जिसमें वह खेती करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। मोहन के दो बेटे थे। बड़ा बेटा सोनू और छोटे बेटे का नाम करन था।
मोहन ने अपने दोनों बेटों को बचपन से ही मेहनत करने की आदत डाली थी, लेकिन उसका बड़ा बेटा आलसी स्वभाव का था। वह अपने ज्यादातर काम आगे के लिए छोड़ देता था। किसी भी कार्य को समय पर नहीं करता था। साथ ही साथ वह जिद्दी स्वभाव का था। उसे अपनी हर बात मनवाने की आदत थी। वह पिता की आज्ञा का पालन भी नहीं करता था, जबकि छोटा बेटा बहुत ही मेहनती और आज्ञाकारी था। वह अपने पिता की हर बात का पालन करता था।
मोहन के पास जो जमीन थी, उसमें पाँच बीघा जमीन तो बहुत ही उपजाऊ थी और पाँच बीघा जमीन पर कड़ी मेहनत के बाद ही खेती बाड़ी हो पाती थी। 
समय बीतता गया। मोहन के दोनों बेटे बड़े हो गए। अब मोहन को बड़े बेटे की चिन्ता सताने लगी, क्योंकि वह बहुत आलसी स्वभाव का था।
अब मोहन ने बँटवारे का निश्चय किया तो बड़े बेटे ने उपजाऊ जमीन की माँग की। मोहन ने पाँच बीघा उपजाऊ जमीन अपने बड़े बेटे को दे दी, जबकि बंजर और ऊसर जमीन अपने छोटे बेटे को दे दी। 
मोहन जानता था कि उसका छोटा बेटा उसकी बात को कभी नहीं टालेगा। करण ने बिना किसी सवाल के पिता का आशीर्वाद समझकर भूमि रख ली और उसी भूमि पर मेहनत से कार्य करने लगा।
धीरे-धीरे समय बीतता गया और सोनू की बंजर भूमि में कड़ी मेहनत रंग ला रही थी। दूसरी ओर सोनू आलसी और अपना काम कल पर छोड़ने वाला था, इसलिए उसने अपनी खेती-बाड़ी चौपट कर डाली।
पिता ने दोनों बेटों को अपने पास बुलाया और कहा, "बेटा करन! मुझे तुम पर पूरा विश्वास था कि तुम अपनी मेहनत से बंजर भूमि में भी फूल खिला दोगे और तुमने वो सच करके दिखा दिया। देखो सोनू! विश्वास और कड़ी मेहनत के बल पर किया गया कार्य हमेशा सफल होता है, इसीलिए अपने जीवन में इन दोनों गुणों को अपना लेना, तभी तुम उन्नति कर पाओगे।" 
सोनू को अपनी गलती पर एहसास हुआ। उसने अपने पिता से वादा किया कि, "आज से वह अपना काम कल पर नहीं छोड़ेगा। ईमानदारी और मेहनत के साथ उसे समय पर पूरा करेगा।

#संस्कार_सन्देश -
हमें अपने बड़ों की आज्ञा का पालन करना चाहिए और उनके ऊपर पूरा भरोसा रखना चाहिए। हर काम कड़ी मेहनत से करना चाहिए, तो हमें सफलता निश्चित मिलती है।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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