शिक्षा ज्योति

 भेदभाव से ऊपर उठकर

शिक्षा ज्योति जलाई है।

खुली हवा में साँस ले रहे

भीम ने ही दिलवाई है।

समता न्याय की जो मशाल

बाबा जी ने जलाई है।

लोकतंत्र व संविधान की

ये ही असली कमाई है।

संघर्ष करो पर रुको नहीं

राह नई दिखलाई है।

मानव को समता की भाषा

आपने ही सिखलाई है।

असली ताकत होती कलम में

अम्बेडकर ने बताई है।

अपने हक की बातें सारी

सबने संविधान में पाई है।

नमन तुम्हें हे राष्ट्रपुरुष 

जन-जन ने महिमा गाई है।

अंधेरे को चीर रोशनी

आशा की तुमने दिखाई है।

सच की राह है सबसे बेहतर 

और सबसे जरूरी पढ़ाई है।

भेदभाव से ऊपर उठकर 

शिक्षा ज्योति जलाई है।


रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या, 
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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