73/2025, बाल कहानी- 28 अप्रैल


बाल कहानी - विद्या का मन्दिर
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एक प्राइवेट स्कूल के बाहर लिखा था- विद्यालय अर्थात विद्या का मन्दिर। क्या ये सच में विद्या का मन्दिर है? आइए, जानने का प्रयास करते हैं।
ये कहानी है शिवा की। शिवा के माता-पिता बचपन में ही गुजर गए थे। उसका बड़ा भाई ही उसे पाल रहा था। बड़ा भाई बिल्कुल भी पढ़ा-लिखा नहीं था। इसलिए वह मेहनत मजदूरी करके किसी तरह घर का खर्च चलाता था। बस, उसका एक ही सपना था, मेरी तरह मेरा भाई अनपढ़ नहीं रहे। इसी सपने को साकार करने के लिए उसने अपने भाई का दाखिला शहर के बड़े प्राइवेट स्कूल में कराया।
शिवा पढ़ने में बहुत होशियार था। हमेशा कक्षा में प्रथम आता था।आज उसके स्कूल में पी० टी० एम० थी। शिवा अपने साथ अपने बड़े भाई महेश को स्कूल लाया था। जैसे ही शिवा अपने भाई के साथ स्कूल के गेट पर पहुँचा, तो वॉचमैन ने शिवा के भाई को स्कूल के अन्दर आने को मना कर दिया। वॉचमैन ने स्कूल की प्रिंसिपल को फोन करके बताया कि, "शिवा का भाई स्कूल के अन्दर आने की जिद्द कर रहा, तो प्रिंसिपल ने शिवा को अकेले अन्दर आने को बोला और उसके भाई को वहीं रुकने को बोलकर फोन रख दिया, लेकिन महेश शिवा के साथ जबरन प्रिंसिपल के रूम में पहुँच गया। जहाँ पहले से ही एक अविभावक प्रिंसिपल रूम में बैठे हुए थे, प्रिंसिपल ने शिवा के भाई को डाँटते हुए कहा, "तुम्हे बिल्कुल तमीज नहीं है, आप ऑफिस के बाहर जाकर इन्तजार करें।" महेश अपने भाई को लेकर रूम के बाहर बैंच पर जाकर बैठ गया। महेश को प्रिंसिपल की डाँट बुरी नहीं लगी। शायद इसलिए कि वो जानता था कि मै अनपढ़ हूँ। ये सारा मन्जर प्रिंसिपल के रूम में बैठे अभिभावक देख रहे थे, जिनका बेटा कक्षा पाँच में द्वितीय स्थान पर आया था। एक अभिभावक ने प्रिंसिपल से पूछा, "प्रथम स्थान पर कौन आया है?" तब प्रिंसिपल ने कहा, "शिवा क्लास चार में प्रथम स्थान लाया है।" ये सुनते ही अविभावक ने प्रिंसिपल से कहा, "आपके स्कूल को शिवा जैसे बच्चे की जरूरत है, शिवा को आपके विद्यालय की नहीं। आपको शर्म आनी चाहिए। आप पैसों और पहनावे से अविभावकों को अन्दर आने देते हैं। शायद अधिकतर प्राइवेट स्कूलों में यही होता है। अब समय आ गया है। हम सबको सोचने की जरूरत है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है? शायद हम सब!

#संस्कार_सन्देश-
वेश-भूषा से हमें किसी भी व्यक्ति का आँकलन नहीं करना चाहिए।

कहानीकार-
#भावना_वर्मा (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय शंकरगढ़ 
बम्हौरी, सुहागी, बँगरा (झाँसी)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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