66/2025, बाल कहानी- 19 अप्रैल
बाल कहानी - सूरज और चन्द्रमा
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एक बार बहुत दिनों तक धरती पर सूरज नहीं निकला। जाड़ों के दिन थे। हाड़ कँपाने वाली सर्दी थी। सभी प्राणी धूप न मिलने के कारण बेहाल हो गए। अन्न दालें, मशाले, कपड़े कैसे सुखाएँ? कैसे नहाएँ और पूजा-पाठ करें। सब-कुछ अव्यवस्थित हो गया। लोग दिन-भर रजाई में दुबके रहते, पर बच्चों को कैसे समझाएँ? जो किसी भी ऋतु में बाहर निकले और खेले बिना नहीं मानते।
बहुत दिनों तक जब सूरज नहीं निकला और संसार के क्रिया-कलाप रुक से गये, तब सूरज को अहंकार हो गया। वह चन्द्रमा से बोला, "देखो, चन्द्रमा! मेरे बिना संसार चल नहीं सकता।" चन्द्रमा ने कहा, "सूरज भाई! इतना अहंकार क्यों करते हो? माना कि तुम संसार को गर्मी देते हो, लेकिन मैं भी तो रात्रि में शीतलता प्रदान कर तुम्हारी तपन को शान्त कर धरती को सुखी करता हूँ। तुम दिन में ऊर्जावान होते हो, मैं रात्रि में अपनी चाँदनी से औषधियों और दिशाओं को पुष्ट करता हूँ। उनमें रस का संचार करता हूँ। उनमें स्वाद और पौष्टिकता भरता हूँ, तभी सभी लोग उन्हें ग्रहण कर पाते हैं।"
यह सुनकर सूरज बहुत लज्जित हुआ और बोला, "हाँ, भाई! ये तो मैंने कभी सोचा भी नहीं था। हम दोनों का कार्य बराबर है। मैं दिन में संसार को ऊर्जा देता हूँ और तुम रात में सभी चीजों को पुष्टता प्रदान करते हो। संसार को दोनों चीजों की जरूरत है। मेरे उगने के साथ ही आक्सीजन धरती पर फैलने लगती है और तुम्हारे आने पर कार्बनडाई ऑक्सीजन पौधों के लिए आ जाती है, जो कि उन्हें जरुरी है। मैं लोगों को दिन मे पुष्ट करता हूँ और तुम रात मे पेड़-पौधों और लताओं, फल-फूल, सब्जियों को कार्बन डाई ऑक्सीजन देकर अपनी शीतलता से पुष्टता देकर, रसमय, खाने योग्य बनाते हो। मैं अन्न-वस्त्र, दालें, मशालें, सूखे मेवा सुरक्षित रखता हूँ। तुम रसभरी चीजों को जीवन प्रदान करते हो।"
यह सुनकर चन्द्रमा बहुत खुश हुआ। और सूरज से विदा लेकर चला गया।
#संस्कार_सन्देश -
संसार के लिए सूरज और चन्द्रमा दोनों का समान महत्व है। एक ऊर्जा देता है तो दूसरा रस और स्वाद प्रदान करता है।
रचना-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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