53/2025, बाल कहानी- 01 अप्रैल


बाल कहानी - साइबर अपराध
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सायना का विवाह समीर के साथ पाँच वर्ष पूर्व हुआ था। समीर एक बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत था और सायना एक कुशल ग्रहणी।
दोनों का एक तीन वर्षीय बेटा भी था। समीर और सायना का छोटा-सा संसार खुशियों से भरपूर था। समीर सुबह ऑफिस जाता और सायना घर के काम करती और अपने बेटे की देख-भाल करती।
एक दिन समीर सुबह अपने ऑफिस के लिए निकला और सायना घर के कामों में व्यस्त हो गयी।
दोपहर के समय सायना के मोबाइल पर घन्टी बजी। साइना ने फोन रिसीव किया और कहा, 'हैलो' तो दूसरी तरफ से फोन पर एक आदमी की आवाज सुनायी दी और उसने कहा कि, "समीर को सी०बी०आई० के अधिकारियों ने रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया है। अगर आप यह मामला रफा-दफा करना चाहती है, तो दो लाख रुपए मेरे बताए हुए अकाउन्ट में भेज दो।"
सायना यह सब बातें सुनकर घबरा गई, उसके मुँह से शब्द नहीं निकल रहे थे।
परन्तु सायना एक सुशिक्षित महिला थी, उसे आजकल हो रहे साइबर अपराध का ख्याल आया। साइना ने अपने-आप को सँभालते हुए फोन पर उस आदमी को डाँटते हुए कहा, "मैं तुम्हारी कम्प्लेंट 1930 पर अभी करती हूँ।" इतना सुनते ही दूसरी तरफ से फोन कॉल काट दी गयी। साइना ने तुरन्त अपने पति के बैंक में फोन किया एवं इस घटना की जानकारी दी। समीर ने सायना की प्रशंसा की और कहा, "तुम सच में एक समझदार पत्नी हो।" सुनकर शायना बहुत प्रसन्न हुई। 

#संस्कार_सन्देश - 
हम सभी को सदैव अपनी बुद्धि, विवेक और धैर्य से काम लेना चाहिए।

कहानीकार-
#रचना_तिवारी (इं०स०अ)
प्राथमिक विद्यालय ढिमरपुरा पुनावली- कलां, ब्लाक- बबीना 
जिला- झाँसी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद #दैनिक_नैतिक_प्रभात

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