शिक्षिका हूँ मैं
शिक्षिका हूँ मैं, मेरा काम है पढ़ाना,
बच्चों में विभिन्न कौशलों को जगाना,
कोशिश करती हूँ सदा प्यार से पढ़ाऊँ,
उनके भीतर बैठे मैं हर डर को हराऊँ,
क्या सही क्या गलत इसका बोध कराऊँ,
सच्चाई के मार्ग पर चलना सिखाऊँ,
आदर और कर्तव्य के भाव जगाऊँ,
उन्हें उनके अधिकारों का भी ज्ञान कराऊँ,
हर बच्चा खास है अनमोल मेरे लिए,
सबको समान भाव से मैं पढ़ना सिखाऊँ,
प्रत्येक बच्चा जब अच्छा इंसान बनेगा,
मुझमें तभी संतुष्टि का भाव जगेगा,
शिक्षिका हूँ मैं, मेरा काम है पढ़ाना,
प्रेरणा देकर बच्चों को निरंतर आगे बढ़ाना।।
रचयिता
दीपा सैनी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय जौलचौरा,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

बहुत सुंदर
ReplyDeleteसुंदर👌👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद मैम🙏🙏
DeleteNice 😍
ReplyDeleteThank you
Deleteबहुत सुंदर शब्दों को पिरोया है मैम आपने अपनी इस कविता में ...keep it up ma'am
ReplyDeleteउत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार🙏🙏
Deleteबहुत बढ़िया👌👌👌👌
ReplyDelete