डॉ0 अब्दुल कलाम

नवयुग के नव निर्माता को,

हम अपना सलाम कर जाएँ,

स्व की छोड़ देश की सोचें,

आओ हम कलाम बन जाएँ।


जाति धर्म के बंधन तोड़ें,

हर धर्म गीत को संग में गाएँ,

मानव को बस मानव समझें,

जीवन उस महामानव सा बनाएँ।


अर्श फर्श का भेद मिटाकर,

अपना मार्ग स्वयं गढ़ जाएँ,

मातृभूमि के कर्ज चुकाने,

हम कलाम से शिक्षा पाएँ।


अग्नि पंख पर करे सवारी,

विश्वगुरु भारत बन जाए,

नित राष्ट्र उन्नति का सोचें,

हम सुविचार कलाम से पाएँ।


राष्ट्र हेतु हो अपना तन मन,                                    

शिक्षित हो हर मानव जीवन,

आज कलाम के जन्मदिवस पर,

हों कुछ नए संकल्प और प्रण।


एक विचार युगों को बदले,

हम ऐसा विचार बन जाएँ,

सरल, मृदुल आचरण बनाएँ,

हम कलाम को शीश नवाएँ।


रचयिता
पूनम दानू पुंडीर,
सहायक अध्यापक,
रा०प्रा०वि० गुडम स्टेट,
संकुल-तलवाड़ी,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली, 
उत्तराखण्ड।



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