देश के गौरव देश की शान
देश के गौरव देश की शान।
डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम।।
किया नवभारत निर्माण।
अबुल पकिर जैनुल अब्दीन
अब्दुल कलाम पूरा नाम।।
15 अक्टूबर 1931 जन्मे।
रामेश्वर(तमिलनाडु) धाम।।
जीवन रहा अत्यंत कष्टमय।
न कभी हारे न हुए कभी परेशान।।
असफलता हराकर सफलता पाई।
बने सफलता की परिभाषा महान।
सुबह-सुबह मदरसे में पढ़ने जाते।
आकर, रेलवे, बस स्टेशन पर अखबार बाँटते।
छोटा नहीं होता मेहनत से किया काम।
दिया आत्मनिर्भरता का पहला पैगाम।।
माँ की सत्ययता, स्नेह, कर्मठता ने
करना सिखाया नारी सम्मान।
बने सादगी, मितव्ययी, ईमानदारी
दृढ़ निश्चयी, अद्भुत सोच, व्यक्तित्व महान।।
1955 तकनीकी शिक्षा मद्रास I.T.A.U. में पाई।
फिजिक्स, गणित में था अति उत्तम ज्ञान।
बने वैज्ञानिक, अभियंता अंतरिक्ष अनुसंधान।
देश को दी विज्ञान जगत में नई पहचान।।
1962 चार दशक तक D.R.D.O.को हुए समर्पित।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान में दिया अतुलनीय योगदान।
पहला स्वदेशी उपग्रह M.L.V. तृतीय बनाया।
अग्नि, पृथ्वी मिसाइल बनाई, पोखरण परीक्षण सफलता पाई।
मिला मिसाइल मैन नाम, देश का विश्व में बढ़ाया मान।।
रक्षामंत्री, वैज्ञानिक सलाहकार बने, देश का ऊँचा किया नाम।।
25 जुलाई 2002 में ग्यारहवें राष्ट्रपति नियुक्त हुए।
जन सेवक बन पाया,"जनता के राष्ट्रपति नाम"।
अतुलनीय योगदान, नवभारत निर्माण से पाए।
भारत रत्न, पद्म भूषण, पद्म विभूषण, हूवर पदक सम्मान।।
अपनी लेखनी से लिखी पुस्तकें, दिया देश को वरदान।
इंडिया 2020, इग्नाइटेड माइंड्स, माईजर्नी ट्रांसफॉर्मिग ड्रीम्स
टर्निंग प्वाइंट, इंडमिटेबल स्पिरिट, इंस्पायरिंग थॉट, अग्नि उड़ान।
सफलता के 10 मंत्र से विद्यार्थियों को दिया संजीवनी बूटी दान।।
देखो उनके विचार महान, युवा पीढ़ी को मिला वरदान।
वायुयान से भी बड़ी होती है हौंसलों की उड़ान।
सपने ऐसे देखो जो सोने न दे, दिया सफलता ज्ञान।
ना हो साथ कोई अकेले चलो तुम, साथ तुम्हारे आसमान।।
कठिनाइयाँ हमें बर्बाद करने नहीं आतीं बल्कि
देती हमें, हमारी छिपी सामर्थ्य का ज्ञान।
एक अच्छी पुस्तक हजार दोस्तों के बराबर।
एक अच्छा दोस्त एक पुस्तकालय के समान।।
देश का सबसे अच्छा दिमाग कक्षा की आखिरी
बेंच पर भी मिल सकता है दिया ऐसा व्याख्यान।
अगर सूर्य की तरह चमकना चाहो, तो सूर्य की तरह
पहले जलना होगा, दिया संघर्ष, सहनशीलता बान।
चिड़िया बारिश में छाया तलाशती, गरुड़ घूमे आसमान।
जो बनाये लक्ष्य महान, करे मेहनत, अपने सपनों को दे उड़ान ।
ब्रह्मांड बने अनुकूल, उसे मिले प्रतिफल महान।
ऐसे बनो युवाओं, गाये गाथा देश तुम्हारी, बनो देश की शान।।
27 जुलाई 2015 पंचतत्व में विलीन हुये अनमोल रत्न कलाम।
शिलांग(मेघालय) धाम, I.I.M. में देते हए ज्ञान व्याख्यान। अनमोल रत्न विरक्ति पर रोई धरती, रोया आसमान।
जन्म दिवस को मनाए विश्व विधार्थी दिवस दिया नाम।।

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