अब्दुल कलाम

15 अक्टूबर 1931 धनुषकोडी (तमिलनाडु) एक गाँव

मुस्लिम परिवार के पूत ने दिखाये पालने में पाँव।

धरती का एक लाल हुआ, रत्न हुआ अनमोल

जिसकी प्रतिभा का पूरे देश में रहा ना कोई जोड़

नाम था उनका अबुल पाकिर जैनुल अब्दुल कलाम

करता है आज सारा हिन्दुस्तान सलाम।

कठिनाइयों और हालातों से कभी ना मानी हार

साहस हिम्मत, बनी रही सफलता का त्योहार।

अनुशासन से बँधा रहा सदा ही उनका जीवन

संघर्षों से तपकर ही जीवन बन गया कुंदन।

सरलता, कर्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी थी उनका धन

देशप्रेम ही सर्वदा था उनके जीवन का सच्चा धन।

गरीबी को ना बनने दिया, कभी राह का रोड़ा

वैज्ञानिक, अभियन्ता, विचारक थे वो, लालच न था थोड़ा।

जाति धर्म की दीवार न रखी, देशप्रेम ही पूँजी थी,

गीता और कुरान में देखी, जीवन की कुंजी थी।

आदर्शों की प्रतिमा बन कर, देश को राह दिखाया

भारत के अनमोल रत्न थे, देश ने गौरव पाया।

मिसाइल मैन बन कर देश का मान बढ़ाया।।


रचयिता
मंजरी सिंह,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उमरी गनेशपुर,
विकास खण्ड-रामपुर मथुरा,
जनपद-सीतापुर।


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