जगजननी माँ
शारदीय नवरात्रि का पर्व खुशियों के साथ मनाते हैं
जगजननी जगदम्बा के चरणों में शीश नवाते हैं
नवरात्रि में माता को नौ रूपों में पूजा जाता है
नौ दिन की साधना से ही मनवांछित फल पाया जाता है
प्रथम शैलपुत्री रूपे द्वितीय ब्रह्मचारिणी,
तृतीय चंद्रघंटा, चतुर्थ कूष्माण्डा रूप में
पंचम स्कंदमाता, षष्ठम कात्यायनी,
सप्तम कालरात्रि, अष्टम महागौरी
नवम सिद्धिदात्री नमस्तस्यै परमेश्वरी
तुम ही अन्नपूर्णा तुम ही शक्तिदायिनी
आपके आगमन से पावन हर घर द्वार हुआ
जिसने माँ तेरा गुण गाया भव सागर से पार हुआ
रचयिता
शालिनी शर्मा,
सहायक अध्यापक,
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छापुर,
विकास खण्ड-भगवानपुर,
जनपद-हरिद्वार,
उत्तराखण्ड।

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