सेना का जवान मतवाला

नब्ज जमाती सर्दी हो या,
जेठ दुपहरी का तपता दिन।
कभी न डिगती हिम्मत उसकी,
बढ़ता और मनोबल प्रतिदिन।।

घर से दूर अकेला रहकर,
पीता है नित गम की हाला।
विषम परिस्थितियों से लड़ता,
सेना का जवान मतवाला।।

भारतीय सेना के आगे,
नतमस्तक हर जन होता है।
जो इससे टकराता है वो,
अपना जन धन सब खोता है।।

सारे देश विश्व के देखो,
जपते हैं इसकी ही माला।
विषय परिस्थितियों से लड़ता,
सेना का जवान मतवाला।।

मिलती राहत चंद दिनों की,
छुट्टी में घर अपने जाता।
और बिताकर छुट्टी सारी,
भारी मन से वापस आता।।

प्रेयसी की यादों के संग,
पीता है विरहा का प्याला।
विषम परिस्थितियों से लड़ता,
सेना का जवान मतवाला।।

मातृभूमि की खातिर जीता,
और उसी पर मर जाता है।
माँ के दूध का लड़ते-लड़ते,
कर्ज अदा वो कर जाता है।।

दुश्मन भी उसके गुण गाता,
आज पड़ा ये किससे पाला।
विषम परिस्थितियों से लड़ता,
सेना का जवान मतवाला।।

रचयिता
प्रदीप कुमार चौहान,
प्रधानाध्यापक,
मॉडल प्राइमरी स्कूल कलाई,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।

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