मेरी दुनिया

मेरी दुनिया जहाँ बदलती है,
शिक्षा की ज्योति जलती है।
कॉपी, कलम, किताबों की,
झिलमिल हुए से ख्वाबों की।
तस्वीर जो भी बनती है।
शिक्षा वो रंग भरती है।
मेरी दुनिया वहाँ बदलती है।
हाथों से लिख बनाते हैं,
हम तकदीर यूँ सजाते हैं।
अब रोशन हैं दीप मन के,
वो सपने तमाम मन के।
जब किताब बात करती है।
मेरी दुनिया वहाँ बदलती है।
सबको बातें ये बतानी हैं,
कुछ राहें नयी दिखानी हैं।
यूँ थककर न बैठ जाना है,
हमें मंजिल की ओर जाना है।
हर राह हर दिशा कहती है,
शिक्षा ही इंसान गढ़ती है।
सबकी दुनिया जहाँ बदलती है।

रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रभारी अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला, 
जनपद -सीतापुर।

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