अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

21 फरवरी आज के दिन पूरा विश्व
है मानता अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस।
देता बढ़ावा भाषाई विविधता और बहुभाषिता को
मातृभाषा के प्रति जागरूक करता जन जन को।

बचाने अपनी मातृभाषा के अस्तित्व को
1952 में आज ही स्थान था विश्वविद्यालय ढाका
हुआ था विरोध प्रदर्शन जहाँ बहुत बड़ा
हर विद्यार्थी सामाजिक कार्यकर्त्ता था भाषा को बचाने के लिए खड़ा।

प्रदर्शन बदला नरसंहार में
सोलह लोगों की जानें गई इस हाहाकार में।
युनेस्को ने दिया इन सबको सम्मान
1999 में घोषणा कर, दिया इस दिवस को स्थान।

हर वर्ष इस दिवस की होती अलग है थीम
विकास, शान्ति और सन्धि में देशज भाषाओं की बने टीम।
गाँधी जी भी बोले थे, समाप्त हो अंग्रेजी भाषा का प्रभुत्व
भारत विभाजन का था यही कारण, खो रहा था हिन्दी का अस्तित्व।

अन्त में हम लें आज ये शपथ
हमारी क़ामयाबी का हमारी मातृभाषा ही है पथ।
अपनाकर इसे नहीं मंजिलें मुश्किल और दूर हैं
मनवाते लोहा विश्व को, हम हिन्दुस्तानी वो शूर हैं।

  इस देश को जगाने वाले "भारत दुर्दशा" के
   भारतेन्दु हरिशचन्द्र भी कह गए-

"निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय को शूल।"

रचयिता 
मोनिका रावत,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय पैठाणी,
विकास खण्ड-थलिसैण, 
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

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