मैं स्त्री हूँ

स्त्री हूँ मैं स्त्री हूँ
मुझे गर्व है कि मैं स्त्री हूँ
किसी की बहन तो किसी की बेटी हूँ
किसी की पत्नी तो किसी की बहू है

स्त्री हूँ मैं स्त्री हूँ
मुझे गर्व है कि मैं स्त्री हूँ
कभी माँ तो कभी सफल शिक्षिका हूँ
कभी दोस्त तो कभी हमसफ़र साथी हूँ

स्त्री हूँ मैं स्त्री हूँ
मुझे गर्व है कि मैं स्त्री हूँ
समाज की रूढ़ि बेड़ियों से खुद को आजाद रखती हूँ
लेकिन अपनी संस्कृति और परंपरा को निभाती रहती हूँ

स्त्री हूँ मैं स्त्री हूँ
मुझे गर्व है कि मैं स्त्री हूँ
घर परिवार के सभी सदस्यों को एक दूसरे से जोड़कर रखती हूँ
सबकी जरूरतों का ख्याल मैं बहुत ही तत्परता से करती हूँ

स्त्री हूँ मैं स्त्री हूँ
मुझे गर्व है कि मैं स्त्री हूँ
अपनों जैसा ही व्यवहार मैं विद्यालय में भी रखती हूँ
बच्चों के साथ प्रेम, स्नेह और ममत्व से बच्ची बनकर रहती हूँ

स्त्री हूँ मैं स्त्री हूँ
मुझे गर्व है कि मैं स्त्री हूँ
नारी के अनेक रूपों को मैं अपने भीतर रखती हूँ
कभी दुर्गा, कभी सरस्वती, कभी लक्ष्मी बन जाती हूँ

स्त्री हूँ मैं स्त्री हूँ
मुझे गर्व है कि मैं स्त्री हूँ
देखो तुम जिस नजरिए से उतने रूप बदलती हूँ
समझो ना तुम मुझे नासमझ सब समझ कर भी मैं नासमझ  बनती हूँ

 स्त्री हूँ मैं स्त्री हूँ
 मुझे गर्व है कि मैं स्त्री हूँ
               
रचयिता
सोनम  गुप्ता,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय शिवरामपुर,
शिक्षा क्षेत्र-बेरूआरबारी,
जनपद-बलिया।

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