रक्षाबंधन

सावन का नाम सुनते ही

याद आता है सबको

झूला, चूड़ी, बिंदी, कंगन


मगर मुझे सताने लगती हैं

 यादें अपने मायके की

मन में आता है रक्षाबंधन


याद दिलाता है बचपन की

मायके की मिट्टी का

महकता हर कण-कण


भाई-बहन का प्यार

पवित्र होता है इस तरह

जैसे शिव के माथे का चंदन


लम्बी हो मेरे भाई की उम्र

हाथ जोड़ कर ईश्वर से

दिन रात करती हूँ मैं वंदन


फलें-फूलें सदा खुश रहें

चमके नसीब मेरे भाई का

ऐसे जैसे चमके कुंदन


रचयिता

भावना तोमर,

सहायक अध्यापक,

प्राथमिक विद्यालय  नं०-1 मवीकलां,

विकास खण्ड-खेकड़ा,

जनपद-बागपत।

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