जय उत्तराखंड
मस्तक पर है मुकुट हिमालय हरी-भरी पोशाक है,
नदियाँ जिसके पग धोती हैं, ऐसा राज्य महान है।
ऊँचे-ऊँचे पर्वत जिसके, नदियाँ बेहिसाब हैं,
हरे-भरे वन और उपवन हैं, झीलें बेमिसाल हैं।
वृक्षों पर कलरव करते पक्षी कुछ गीत सुनाते हैं,
बाघ, तेंदुए और हाथी भी मस्ती में मंडराते हैं।
ऐसी पावन जन्म भूमि को शत-शत मेरा प्रणाम है,
मातृभूमि पर बलि-बलि जाऊँ ये मेरा अरमान है।
कूर्म और गढ़ दो मंडल भाई-भाई समान हैं,
धर्म और संस्कृति को लेकर चारों धाम विद्यमान हैं
गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्री और केदारनाथ हैं।
नानकमत्ता, रीठासाहिब और पूर्णागिरी धाम हैं।
चर्च और मस्जिदें यहाँ पर सब धर्मों का मान है,
हिन्दू -मुस्लिम -सिख -ईसाई सबको यहाँ प्रणाम है।
धन्य -धन्य यह देवभूमि यहां देवों का निवास है।
ऐसी पावन धर्मभूमि को शत - शत मेरा प्रणाम है।
जय उत्तराखंड, जय उत्तराखंड जय जय राज्य महान है।
रचयिता
मीनू जोशी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या जूनियर हाई स्कूल चौसाला,
विकास खण्ड-धौलादेवी,
जनपद-अल्मोड़ा,
उत्तराखण्ड।

बहुत सुन्दर रचना
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