उत्तराखंड प्रदेश हमारा
उत्तराखंड प्रदेश हमारा
जग में सबसे सुंदर, प्यारा
सांझ-प्रात स्वर्णिम आभा ले
मुकुट शिवालिक नभ को थामे
जिसके शिखरों के बीच छिपी,
फूलों की घाटियाँ अनेकों
ताल, सरोवर, गुप्त गुफाएँ
औ दुर्लभ से जंतु अनेकों
जन्मी हैं जिसकी गोदी में गंगा, यमुना अमृत लेकर
उत्तराखंड प्रदेश हमारा.....
यह जन्मभूमि शहीदों की
देश के पहरेदारों की है
रंगभूमि यह नृत्यकला की
गीतों के उद्गारों की है
कर्मभूमि महिलाओं की है
खेती- बाड़ी पशुपालन में,
करघे के सुंदर वस्त्रों और
कालीनों के उत्पादन में
उत्तराखंड प्रदेश हमारा....
आओ, इसको और सजा लें
मधु, छवि रसमय फल-फूलों के
नये-नये उद्यान लगाकर
रोग-विनाशक औषधियों से
हर बंजर घाटी पर्वत को,
हरा-भरा करके दिखला दें
चारा और जल देने वाले
बांज, उतना के वृक्ष लगा दें
उत्तराखंड प्रदेश हमारा....
लुप्त हो रहे पशु-पक्षी जो
वातावरण बिगड़ जाने से
वृक्षों के निर्मम कटाव औ
जल-स्रोतों के मिट जाने सै
अनुकूल दशा में इनको
आओ, रखें सुरक्षा देकर
हत्यारों से इन्हें बचाकर,
माँ की ममता इनको देकर
ये ही तो हैं सबल सहारा
उत्तराखंड प्रदेश हमारा...
तपोभूमि यह आदिकाल से
यहाँ शांति है, शुद्ध पवन है
प्रकृति का यहाँ रूप मनोहर
सबको देता आवाह्न है
हर शिखर यहाँ देवालय है
हर संगम है तीर्थस्थल
मंदिर देते शांति हृदय को
सरिताएँ देतीं निर्मल जल,
सर्वधर्म समभाव इसका नारा
उत्तराखंड प्रदेश हमारा....
पल-पल रूप बदलता रहता,
मोहक पर्वत मालाओं का
छोर नहीं मिलता है जिनकी
सुंदरता की सीमाओं कि
बादल भी हिमाद्रि पर अपनी
बहुरंगी आभा लाते हैं
यही रुपहला दृश्य देखने
पर्यटक देश- विदेश से आते हैं
यह गौरव, अभिमान हमारा,
उत्तराखंड प्रदेश हमारा
जग में सबसे सुंदर प्यारा
रचयिता
गीता जोशी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय जैनौली,
विकास खण्ड-ताड़ीखेत,
जनपद-अल्मोड़ा,
उत्तराखण्ड।

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