टपका का डर

टपका का डर,

कक्षा- 2   

पाठ 5 (कलरव)


बच्चों एक दिन की बात सुनो,

बरसात के रोज़ की कथा सुनो।

पानी बरस रहा था झम-झम,

दादी का घर भीगे जमकर।।

 

एक पुराना छप्पर भीगा,

भीग भीगकर खूब वो टपका।

दादी को कुछ उपाय न सूझा,

सोचे बेचारी कैसे रोके टपका।।


ओले पड़े और मौसम बिगड़ा,

बाघ एक जंगल से निकला।

बारिश ओले से हो परेशान,

बचने दादी के घर पर पहुँचा।।


दादी बैठी चूल्हे पर,

पका रही थी भात।

पानी टपक-टपककर देखो,

करता था जी भर परेशान।।


बड़ बड़ करती दादी बोली,

ये टप टप मुझे डराती है।

बाघ से डरती नहीं कभीं वो,

इस टपके से डर जाती है।।


बाघ सुनकर दादी की बातें

सोचे टपका कैसा होगा।

शायद कोई बड़ा जीव है,

दादी को जो डराता होगा।।


सिर पर पैर रखकर वो भागा,

टपका सुनकर दम निकल गया।

आया था दादी को डराने,

खुद ही डर कर भाग गया।।


रचयिता
डॉक्टर नीतू शुक्ला,
प्रधान शिक्षक,
मॉडल प्राइमरी स्कूल बेथर 1,
विकास खण्ड-सिकन्दर कर्ण,
जनपद-उन्नाव।


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