अवनि अवतारी

सादगी, सदविचार हो, स्वतंत्रता समर की हो या आँधी|
भारत के लाल, लालबहादुर, महात्मा बन आये गांधी||
सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, सत्याग्रह, मानवता के पुजारी|
जन आंदोलन के नायक बन, कुर्ता, धोती, घड़ी धारी||
साधारण, सज्जन बन, ओजस्वी भारत के भाग्य विधाता|
कद नाटा, गहरी सोच, हृदय धर कल्याण मात्र भारत माता||
अंग्रेजो भारत छोड़ो, नमक कानून तोड़, करो मरो का नारा|
जन-जन हृदय राज करा वो, साबरमती का प्यारा||
आधी रोटी खाऍंगे, अन्न उगाकर भारत भाग्य बनाऍंगे|
यदि तुमने आँख दिखाई, छाती पर चढ़ नाच दिखाऍंगे||
राम नाम धुनि, अलख जगाकर, भारत दर्शन बतलाया|
आदर्श, सत्य, महात्मा बन, अपरिग्रह मानुष समझाया||
धरती पर आयी अन्न समस्या, नई राह सबको दिखलाया|
जन- जन तक विचार फैलाकर, एक दिन उपवास का मार्ग बताया||
हिन्द के संस्कार, विचार में पले बढ़े, वह दोनों थे भारत रतन|
जन साधारण, जन नायक, तुमको करता 'अभिनव' नमन||

उऋण नहीं है, हे महापुरुष! अवनि अवतारी|
वास्तव में भारत के लाल, महात्मा  थे जन दुःखहारी||
 
रचयिता
आनन्द पाठक 'अभिनव',
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय खाचकी मई,
विकास खण्ड-कड़ा,
जनपद-कौशाम्बी।

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