कमल

कीचड़ में खिलकर भी उसने,

 राष्ट्रीय मुकाम बनाया है।


 बच्चों कमल ने हम सबको,

 बहुत कुछ समझाया है।


 तोड़ने जब कोई आता है,

 दलदल पार कराता है।


अपनी रक्षा और सुरक्षा,

 करता और कराता है।


बुराइयों (कीचड़)में रहते हुए भी,

अच्छाई ना छोड़े हैं।


कमल पुष्प पर ब्रह्मा पधारें 

जो जग के निर्माता हैं।


माँ शारदे जिस आसन पे हैं विराजे, 

कमल पुष्प कहलाता है।


अपने धैर्य और क्षमता को,

कमल हमें बतलाता है।


अपने गुणों की ही खातिर,

राष्ट्रीय पुष्प कहलाता है।


स्वार्थ रहित इस दुनिया में,

तुम भी कुछ कर जाओ।


जन जीवन में अमर रहो,

दुनिया में नाम कमा जाओ।


रचयिता
नीलम सिंह, 
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय रतनगढ़ी,
विकास खण्ड व जनपद-हाथरस।

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