मेरी बेटी है मेरा अभिमान

मेरी बेटी मेरा अभिमान

मत भूलो देना बेटी को सम्मान 

आज के युग में दोनों में भेद नहीं है 

बेटा- बेटी एक समान


बेटी भी कर सकती है हर काम

बेटी पढ़-लिख कर रोशन करती नाम         

बेटा चाहे छोड़ भी दे 

माँ-बाप का हाथ लेती थाम


सींचा था बेटे को, पर बढ़ गई बेटी

प्यार दिया बेटे को, संस्कार पा गई बेटी       

काश बेटी को भी सींचा होता 

तो कितनी बढ़ जाती बेटी


अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर

आओ संकल्प यही करें

बेटों को संस्कार ऐसे दें

हर बेटी का मान- सम्मान करें।


रचयिता
रेनू चौधरी,
एआरपी विज्ञान,      
विकास खण्ड-मुरादनगर,
जनपद-गाजियाबाद।



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