सुनो बेटी

सुनो बेटी
तुम परहेज करो चंद शब्दों से।
कोमल, कली, नाजुक, फूल, लाजवंती
धरती, सहनशील, अबला और भी ऐसे।
कमजोर करते हैं ये शब्द तुम्हें
तुम्हें बनना होगा वज्र सी कठोर,
तुम बनो काँटों सी तीखी।
काली माँ सी सक्षम शत्रु नाशक
तुम्हें बनना ही होगा तलवार की धार।
ताकि कर सको जिस्म के लुटेरे
भेड़ियों पर वार।
मत बनना ऐसी लाजवंती कि
बता न सको खुद पर हुए अत्याचार।
त्याग दो वो सारे उपमान,
जो तुम्हे कमजोर बनाते हैं।
जब तक रहोगी बेल बन सहारे पर खड़ी
रहोगी दुविधाओं में यूँ सदा ही पड़ी।
तुम्हें बनना है  मजबूत चट्टान
तभी बचा पाओगी खुद का सम्मान।
सुनों तुम्हें त्यागने  ही होंगे,
 वो कमजोर उपमान............।
अपनाने होंगे वज्र, तलवार, काली माँ,
चट्टान, कंटक, जैसे मजबूत उपमान।
  सुनो बेटी तुम्हें बदलना ही होगा.........।।

रचयिता
अनीता ध्यानी (अनि),
प्राथमिक विद्यालय देवराना,
विकास खण्ड-यमकेश्वर,
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

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