मुर्गा और लोमड़ी

कक्षा 3, 

पाठ -2, 

विषय- हिन्दी,

मुर्गा और लोमड़ी 

(काव्यरूप में परिवर्तित)

  

मुर्गा बैठा एक पेड़ पर, देख लोमड़ी ललचाई।

बोली बैठो बात करें हम डरो नहीं मुर्गा भाई।।

हैं खूंखार जानवर इतने मैं डरकर ऊपर आया।

पूछा चतुर लोमड़ी ने क्या समाचार ना सुन पाया।।

हमला नहीं करेगा कोई समझौता है  जंगल का।

मुर्गा बोला बहुत सुखद है समाचार ये जंगल का।।

मुर्गा ऊँची गर्दन करता जैसे हो कुछ दीख रहा।

तभी लोमड़ी बोली भैया दूर तुम्हे क्या दीख रहा।।

बहना चार शिकारी  कुत्ते दौड़ लगाते आते हैं।

घबरा गई लोमड़ी बोली भैया अब हम जाते हैं।।

तुम क्यों इतना घबरातीं, समझौता है बात करो।

ये तो अपने जंगल के हैं बैठ प्यार से बात करो।।

जान बची तो फिर मिलेंगे है इससे कुछ बड़ा नहीं।

अभी शिकारी कुत्तों ने तो समाचार ये पढ़ा नहीं।।

भागी चतुर लोमड़ी सोचे मुर्गा हाथ नहीं आया।

चतुराई से जान बचाई मुर्गा मन में हरषाया।।


रचयिता
जीवन बाबू कश्यप 'अंकुश',
सहायक अध्यापक, 
प्राथमिक विद्यालय सरौता,
विकास क्षेत्र-उझानी,
जनपद-बदायूँ।



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