हे युगपुरुष! तुम अमर हो
पोरबंदर गुजरात प्रांत में
एक बालक का हुआ था जन्म,
जिसने अवतरित होकर
भारत- भू को किया था धन्य।
जन-जन के तुम आदर्श हो,
हे युगपुरूष! तुम अमर हो।
दुबले- पतले मोहन जी ने,
ख्याति प्राप्त की पढ़-लिखकर
सत्य, अहिंसा, प्रेम के संग
देशभक्ति थी कूट- कूट कर
सत्याग्रह के तुम्हीं प्रणेता हो,
हे युगपुरुष! तुम अमर हो।
गुलामी, अत्याचार मिटाकर
गोरों की फौजें हटा- हटाकर।
एक नया इतिहास रचाकर
समरसता का भाव जगाकर
करते रहे सेवा नि:स्वार्थ हो,
हे युगपुरुष! तुम अमर हो।
रामराज्य के तुम संस्थापक,
निज कर्तव्यों के संवाहक।
परपीड़ा के तुम संहारक,
सन्मार्ग के पथ-प्रदर्शक।
प्रेम, दया के भंडार हो,
हे युगपुरुष! तुम अमर हो।
रचयिता
गीता जोशी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय जैनौली,
विकास खण्ड-ताड़ीखेत,
जनपद-अल्मोड़ा,
उत्तराखण्ड।
एक बालक का हुआ था जन्म,
जिसने अवतरित होकर
भारत- भू को किया था धन्य।
जन-जन के तुम आदर्श हो,
हे युगपुरूष! तुम अमर हो।
दुबले- पतले मोहन जी ने,
ख्याति प्राप्त की पढ़-लिखकर
सत्य, अहिंसा, प्रेम के संग
देशभक्ति थी कूट- कूट कर
सत्याग्रह के तुम्हीं प्रणेता हो,
हे युगपुरुष! तुम अमर हो।
गुलामी, अत्याचार मिटाकर
गोरों की फौजें हटा- हटाकर।
एक नया इतिहास रचाकर
समरसता का भाव जगाकर
करते रहे सेवा नि:स्वार्थ हो,
हे युगपुरुष! तुम अमर हो।
रामराज्य के तुम संस्थापक,
निज कर्तव्यों के संवाहक।
परपीड़ा के तुम संहारक,
सन्मार्ग के पथ-प्रदर्शक।
प्रेम, दया के भंडार हो,
हे युगपुरुष! तुम अमर हो।
रचयिता
गीता जोशी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय जैनौली,
विकास खण्ड-ताड़ीखेत,
जनपद-अल्मोड़ा,
उत्तराखण्ड।

Comments
Post a Comment