भूस्खलन

भूस्खलन तबाही लेकर आता,

जान - माल को क्षति पहुँचाता।

जगह-जगह पहाड़ी खिसक जाती,

मकानों में सबके दरार पड़ जाती।।

       जमींदोज हो जाते घर - परिवार,

       लोगों का उजड़ जाता संसार।

        लोग  सभी हो जाते बेसहारा।

        जमी में समा जाता घर सारा।।

रास्ते, सड़क सब टूट जाते,

गिर जाते बिजली के पोल।

 जगह -जगह टूट जाते पानी के नल,

दूर से लाना पड़ता पीने को भी जल।।

          यह आपदा अपने साथ,

         लेकर आती बेबसी, लाचारी।

         लोगों के जीवन पर,

         यह आपदा पड़ जाती भारी।।

जान -माल के नुकसान को,

हम कैसे कम कर पाएँगे।

सुरक्षित जगह में बनायें घर,

तभी हम  सब बच पाएँगे।।


रचयिता

कृपाल सिंह शीला,

सहायक अध्यापक,

राजकीय जूनियर हाईस्कूल मुनियाचौरा, 

विकास क्षेत्र - भिकियासैंन, 

जनपद-अल्मोड़ा,

उत्तराखण्ड।



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