मैं भी बेटी हूँ

मैं भी बेटी हूँ, साँस लेती हूँ,

स्पर्श महसूस करती हूँ।

पत्थर नहीं इंसान हो 

यह भी खूब समझती हूँ।

कोमल  सा मन मेरा,

नाजुक सा  तन है।

जीवन की पहली सीढ़ी पर 

आँसू की बूँद टपकती है।

बेटा नहीं पर मैं बेटी हूँ

बेटे का फर्ज निभाओगे।

लिखकर नहीं देती पर 

जीवन भर साथ निभाऊँगी।

मैं बेटी हूँ बेटी होने का दर्द  सहती हूँ। 

फिर भी मैं कहती हूँ 

बेटे का फर्ज निभाऊँगी।

मैं तुमसे ही बनी हूँ, 

बस प्यार की भूखी हूँ।

हर कदम पर मुझे आजमा लेना 

मैं कलंक नहीं हूँ।

जज्बातों पर मैं जीती हूँ, 

अमूल्य नहीं  पर अंश हूँ।

मैं अग्नि में जलकर भी 

अंश तुम्हारा ही रहूँगी।

मैं बोझ नहीं भविष्य बनूँगी।

जीवन पार लगा दूँगी,

लिखकर नहीं देती पर 

अंत तक साथ  निभाऊँगी।

बेटी हूँ इसलिए बेटी का दर्द समझती हूँ। 

मैंने जो जिया जीवन को 

किसी और को ना जीना पड़े 

बस जीवन को समझाती हूँ, 

हाँ मैं बेटी हूँ

बेटी का दर्द समझती हूँ।


रचयिता

राधा  रैदास,

प्राथमिक शिक्षिका,

प्राथमिक विद्यालय अमाड़ी,

विकास खण्ड-बड़वारा,

जनपद-कटनी,

मध्य प्रदेश।

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