सच्चा मित्र

सुख और दुःख दोनों में ही जो,

 हर पल साथ निभाता है

गलत मार्ग से हमें हटाकर,

सही राह दिखलाता है

गुण अवगुण के साथ हमें,

 दिल से जो अपनाता है

इस दुनिया में वही हमारा,

 सच्चा मित्र कहलाता है

 सच्चे मित्र का एक उदाहरण

कृष्ण और सुदामा ने दिया

बिना कहे ही अपने मित्र की

हर विपदा को जान लिया

तीन मुट्ठी चावल के बदले

तीन भुवन का राज दिया

सच्चे मित्र के इन गुणों को,

 जब हम भी अपनाएँगे

सच्चा मित्र बनेंगे हम जब, 

तब ही सच्चे मित्र को पाएँगे

     

रचयिता

शालिनी शर्मा,

सहायक अध्यापक,
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छापुर,
विकास खण्ड-भगवानपुर,
जनपद-हरिद्वार,
उत्तराखण्ड।


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