प्यासी मैना

विषय-हिंदी 
कक्षा-4
पाठ-2 

एक बाग में पेड़ नीम का, खोखल में रहती मैना।
दाना चुगती पीती पानी, मन में खुश रहती मैना।।
गर्मी तेज बहुत प्यासी थी, उड़कर नल के पास गई।
नल के पास पड़ा था सूखा, मैना  बहुत निराश हुई।।
तोता बोला  चलो घड़े में, जाकर  पीते  हैं पानी।
पास गए तो घड़ा गिरा था, उसमें नहीं मिला पानी।।
जामुन पर था एक कबूतर, बोला देखो लाल मकान।
पानी पी  आराम करेंगे, होगी  सारी  दूर थकान।।
लेकिन नहीं मिला जब पानी, हो गए तीनों बहुत उदास।
चिर्र- चिर्र  करती गौरैया, पहुँच गए  सब उसके पास।।
मैं तो अभी नहाकर आई, तुमको नहीं मिला पानी।
एक आँगन में हरियाली है, कुंडा भरा हुआ पानी।।
सारे  पक्षी उड़कर  पहुँचे, देखा पानी  भरा हुआ।
हुदहुद और गिलहरी बैठी, पानी पी मन हुआ हरा।।
पूछे मैना  बहन गिलहरी, भरता  रोज कौन पानी।
एक छोटी सी लड़की भरती, बातों में सबकी नानी।।
रखें हम भी दाना पानी, आओ अब कुछ नया करें।
ईश्वर की हैं सब संतानें, सब जीवों  पर दया करें।। 
सब जीवों पर दया करें।

रचयिता
जीवन बाबू कश्यप 'अंकुश',
सहायक अध्यापक, 
प्राथमिक विद्यालय सरौता,
विकास क्षेत्र-उझानी,
जनपद-बदायूँ।

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