ऐसे थे हमारे गांधी जी

 सच्चाईयों की राहों पर,
 चल पड़े जो कदम उनके!
 एक पल को भी फिर नहीं रुके
 ऐसे थे हमारे गांधी जी|

1 सत्य, अहिंसा, प्रेम, शांति का
 पाठ पढ़ाते गांधीजी
सूत कातते, चरखा चलाते
 खादी के प्रेमी गांधीजी|

2 कितने ही आंदोलन हैं किए
 कितने दुख दर्द सहे सारे
 भारत को स्वतंत्र कराके रहे
 वो कभी नहीं हिम्मत हारे|

3  पतली दुबली कद काठी थी और
     लाठी लेकर चलते थे
    सुख, शांति, प्रेम का पाठ पढ़ाते
     जिस रास्ते से निकलते थे|

4   2 अक्टूबर को दो-दो महान
      विभूतियों ने जन्म लिया
      एक लाल बहादुर शास्त्री और
      एक मोहनदास कहाते थे|

5.  लाल बहादुर शास्त्री भी
      भारत की आँखों के तारे थे
      उनके दृढ़ निश्चय अनुशासन से
      पाकिस्तानी हारे थे|

6    'जय जवान और जय किसान'
       यह शास्त्री जी का नारा था
       तुम  'करो या मरो' साथियों
       यह गांधी जी ने पुकारा था|

7.    ऐसे वीरों के संघर्षों से
       आजाद हुआ देश हमारा है
       उन गांधीजी उन शास्त्री जी को
       शत-शत् प्रणाम हमारा है|

रचनाकार
अनुराधा शर्मा,
इंचार्ज प्रधानाध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय धौली प्याऊ नगर, 
विकास क्षेत्र-मथुरा,
जनपद-मथुरा।

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