इंजीनियर

सपना संजोया आँखों में
पढ़ लिखकर बड़ा बनने का
संकल्प लिया मन में अपने
देश की सेवा करने का
पढ़ने-लिखने में अव्वल था
था जोश जवानी का मन में
इंजीनियर बनने के लिए
दिन रात मैं मेहनत करता था
घंटों लैपटॉप लेकर बैठा मैं
कोडिंग करता रहता था
लाखों की फ़ीस चुकाकर भी
नौकरी को जूते घिसता हूँ
दस बीस हजार के वेतन पर
कैसे जीवन संघर्ष करूँ
कैसे अपने माता-पिता के
सपनों में मैं रंग भरूँ
सोलह घंटे की मेहनत पर भी
अफसर खुश नहीं होते हैं
महीने भर काम कराकर भी
तनख्वाह देने में रोते हैं
कभी डाक्टर डे, कभी शिक्षक डे
इंजीनियर डे मनाते हो
पर क्या सच में इनको इनका
हक और सम्मान दे पाते हो
 चिन्तन और मनन करना
 इंजीनियर के हालातों पर
मत समय बिताना अपना
इधर-उधर की बातों पर

रचयिता
शालिनी शर्मा,
सहायक अध्यापक,
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छापुर,
विकास खण्ड-भगवानपुर,
जनपद-हरिद्वार,
उत्तराखण्ड।

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