पुरस्कार

शिक्षक दिवस पर मुझे भी बड़ा पुरस्कार मिला था,
डायरी कलम व रुमाल मिला था।
युवाओं का साथ बेशुमार मिला था,
बुजुर्गों का प्यार अपार मिला था।

शिक्षक के सम्मान का सौभाग्य मिला था,
कोयल की कूक, गौरैया का हाल मिला था।
उपवन के सुमन का गुलाल मिला था,
बच्चों की कलम का प्रसाद मिला था।

धरती माँ का आँचल दुलार मिला था,
योग संग आरोग्य का उपचार मिला था।
स्वस्थ तन मन का विचार मिला था,
भावनाओं का अनुपम संसार मिला था।

संग्रह को डायरी, वाणी को कलम मिला था,
सर पर वरदहस्त सा वो रुमाल मिला था।
मुझे मेरे जीवन का बड़ा पुरस्कार मिला था,
मुझे मेरे...............................मिला था।।
                                         
रचयिता
कृष्ण कुमार अक्षज,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रामपुर की मड़ैया, 
विकास खण्ड-भाग्यनगर, 
जनपद-औरैया।

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