सब्जी से दोस्ती

पापा के संग थैला लेकर
 सब्जी लेने गया बाजार
चारों ओर चहल-पहल थी
तरकारी की थी भरमार
आलू, गोभी, मूली, गाजर
पालक, भिंडी, फली ग्वार
मटर, टमाटर, लौकी, तोरी
हरी मिर्च के थे भंडार
हमको ले लो, हमको ले लो
कहने लगीं सभी पुकार
आलू बोला मुझको ले लो
मैं तुमको मोटा कर दूँगा
पालक बोला मुझको लेना
मैं तुम में ताकत भर दूँगा
सब की बातें सुनकर मैंने
अपने मन में किया विचार
हर सब्जी के अपने गुण हैं
कोई भी नहीं बेकार
थोड़ी-थोड़ी सब लो पापा
रोज नयी सब्जी खाऊँगा
हर सब्जी को खाकर ही मैं
बड़ा और स्वस्थ बनूँगा
बीमारी सब दूर रहेंगी
आनंद से मैं खुश रहूँगा

रचयिता
शालिनी शर्मा,
सहायक अध्यापक,
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छापुर,
विकास खण्ड-भगवानपुर,
जनपद-हरिद्वार,
उत्तराखण्ड।

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