स्कूल लीडरशिप ट्रेनिंग

जिम्मेदारी की तैयारी,
पड़ने लगी जब सब पर भारी।
तभी साथ हमारा माँग लिया,
लीडरशिप ट्रेनिंग ने दामन हमारा थाम लिया।

अब आई हमारी बारी,
करने लीडरशिप की तैयारी।
एक अनोखा प्रशिक्षण आया,
वेबिनार द्वारा सिखलाया।
कैसे करें हम शिक्षक,
पूरी अपनी जिम्मेदारी
ट्रेनिंग ने हमको बतलाया।
जिम्मेदारी की तैयारी में,
देखो आई लीडरशिप की बारी।

कठोर नहीं, आत्मीय बनना है,
इन्वेंशन से इनोवेशन करना है।
कक्षा में घुट-घुट कर ही नहीं,
प्रकृति के सानिध्य में भी पढ़ना है।
ग्रुप नहीं एक टीम हैं हम,
यूनिटी में हमको रहना है।
जिम्मेदारी की तैयारी में,
देखो आई लीडरशिप की बारी।

याद आये फिर से गिजूभाई,
बालकेंद्रित शिक्षा की बात जब आई।
एक बार फिर ब्लूम की टेक्सोनोमी पढ़ कर,
बीएड की कक्षा में हम आये घूमकर।
कंपास, पॉइंट और जोहरी विंडो,
इन थ्योरी का तो भई क्या कहना है,
अपनी अंतर आत्मा में झाँककर,
पहले अपने आपको समझना है।
कोच हैं हम या मेंटरशिप में,
आत्मचिंतन से जान सकेंगे,
अपने आपको जानकर हम,
स्वयं की शक्ति को पहचान सकेंगे।
होगा स्वयं से जब आत्मसाक्षात्कार हमारा,
स्वयं का तब विकास करेंगे।
जिम्मेदारी की तैयारी में,
देखो आई लीडरशिप की बारी।

समय प्रबंधन को पहचाना,
नेतृत्व का जब सब गुण जाना।
ली अपने हाथ तब जिम्मेदारी,
नेतृत्व की जब आई बारी।
ट्रेनिंग में फिर से जब उभरा सब ज्ञान,
शिक्षक की भूमिका में होता स्वयं पर मान।
सीख रहे हैं, सिखा रहे हैं,
अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
नेतृत्व का सब गुण जानकर,
विद्यालय को आगे बढ़ा रहे हैं।
जिम्मेदारी की तैयारी में,
देखो आई लीडरशिप की बारी।

रचयिता
रिंकू कुमारी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भिखारीपुर,
विकास खण्ड-सदर,
जनपद-चंदौली।

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