मन के सवाल

उठते मन में मेरे कई सवाल,
 दे दो उत्तर तुम तत्काल।
कैसे यह आसमान है नीला?
कौन फूलों को करता पीला?
गिने कभी क्या तुमने अपने बाल?
इतनी तेज क्यों हिरन की चाल?
नदी का पानी क्यों बहता दिन- रात?
 हफ्ते में क्यों होते दिन सात?
बच्चे क्यों करते शैतानी?
बादल ले के क्यों आए पानी?
समुंदर क्यों होता है इतना खारा?
कैसे चमकता है देखो यह तारा?
इतनी तेज हवा कैसे है चलती?
कोयल हमसे क्या है कहती?
कमल क्यों दिखता इतना सुन्दर?
पेड़ से कूदे कैसे ये बंदर?
मन में आते क्यों इतने सवाल?
चलो बताओ तुम इनके जवाब?
यह सब है ईश्वर की माया,
नहीं इसे कोई समझ है पाया।

रचयिता
आकांक्षा मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिकंदरपुर,
विकास खण्ड-सुरसा, 
जनपद-हरदोई।

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