बच्चे की अभिलाषा

अगर मेरे भी पंख होते तो,
आसमान में दौड़  लगाती।।
इधर नाचती उधर नाचती,
पल-पल पेड़ों पर चढ़ जाती।।
पकड़ पेड़ की डाली पर मैं,
पत्ते-पत्ते पर इठलाती।।
कभी फुर्र से घर में आती,
कभी तुरंत फिर आसमान में।।
उछल-उछल कर दौड़ लगाती,
रंग- बिरंगी प्यारी तितली।।
इधर-उधर इठलाती है,
फूलों-फूलों पर मंडराकर।।
मेरे मन को ललचाती है,
कभी पकड़ मुट्ठी में रखकर।।
मन मेरा हर्षाता है,
मगर देख उसका विचरण                           
हृदय प्रफुल्लित हो जाता है।।

रचयिता
दया उपाध्याय,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय उरई, 
विकास खण्ड-कनालीछीना,
जनपद-पिथौरागढ़,
उत्तराखण्ड।

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