पाँच का पहाड़ा

पाँच एक्कम पाँच,
कितना सुंदर काँच।

पाँच दूनी दस,
पियो गन्ने का रस।

पाँच तियाँ पन्द्रह,
गाने का क्या अंतरा।

पाँच चौक बीस,
गुणा भाग की सीख।

पांच पचे पचीस,
 आगे आता है छब्बीस।

पाँच छक्के तीस,
मन में मत रखो टीस।

पाँच सत्ते पैंतीस,
घूमने गया है सतीश।

पाँच अट्ठे चालीस,
कर लो तुम मालिश।

पाँच नवा पैंतलीस,
जूते में हुई पॉलिश।

पाँच दहम पचास,
खाओ चवयनप्राश।

रचयिता
आकांक्षा मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिकंदरपुर,
विकास खण्ड-सुरसा, 
जनपद-हरदोई।

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