विश्व गुरु
विश्व गुरु का तमगे वाला, भारत ढूँढने निकला हूँ।
गली- गली और द्वार-द्वार पर, चमन खिलाने निकला हूँ।।
आज जो हम अपना रहे हैं, दुनिया ने जिसको छोड़ा है।
दुनिया जो छोड़ चुकी है, उससे नाता जोड़ा है।।
किसमें कितना घटा-नफा है, ये समझाने निकला हूँ(1)
नक्षत्र आभूषण शशि है, पति आभूषण है नारी।
पृथ्वी आभूषण भूपति पर, विद्या इन सब पर भारी।।
पूँछ सींग रहित पशु समाना, यह समझाने निकला हूँ(2)
बिन शिक्षा तुम इस दुनिया में, ना कुछ कर पाओगे।
जगह-जगह अपमान मिलेगा, दर-दर ठोकर खाओगे।।
मिलेगी ना स्मार्ट दुल्हनिया, यह बतलाने निकला हूँ(3)
रचयिता
अजय विक्रम सिंह,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मरहैया,
विकास क्षेत्र-जैथरा,
जनपद-एटा।
गली- गली और द्वार-द्वार पर, चमन खिलाने निकला हूँ।।
आज जो हम अपना रहे हैं, दुनिया ने जिसको छोड़ा है।
दुनिया जो छोड़ चुकी है, उससे नाता जोड़ा है।।
किसमें कितना घटा-नफा है, ये समझाने निकला हूँ(1)
नक्षत्र आभूषण शशि है, पति आभूषण है नारी।
पृथ्वी आभूषण भूपति पर, विद्या इन सब पर भारी।।
पूँछ सींग रहित पशु समाना, यह समझाने निकला हूँ(2)
बिन शिक्षा तुम इस दुनिया में, ना कुछ कर पाओगे।
जगह-जगह अपमान मिलेगा, दर-दर ठोकर खाओगे।।
मिलेगी ना स्मार्ट दुल्हनिया, यह बतलाने निकला हूँ(3)
रचयिता
अजय विक्रम सिंह,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मरहैया,
विकास क्षेत्र-जैथरा,
जनपद-एटा।

बेहतरीन👍👍👍💐💐💐💐
ReplyDeleteSuper
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