शिक्षक की चाह
मुझे शिक्षक बनकर रहने दो"
मुझे रहबर बनकर जीने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
मेरा काम तो पढ़ना-पढ़ाना है,
मेरा काम इल्म सिखलाना है।
मुझे प्यार है अपने शिष्यों से,
मुझे इनका मुस्तकबिल बनाना है।
मुझे ज्ञान की नय्या खेने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
मुझे न उलझाओ खातों में,
न डालो बेकार की बातों में।
मुझे प्यार बहुत है भारत से,
मुझे देश को आगे बढ़ाना है।
मुझे मेरे वजूद में जीने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
तुम न करवाओ जनगणना,
न करनी मुझको मतगणना।
मुझे करने दो बस मन गणना,
मुझे हर जन शिक्षित बनाना है।
मुझे बीज इल्म के बोने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
न एम डी एम का भार रहे,
न ड्रेस का कोई सार रहे।
ये बच्चे भूखे ज्ञान के हैं,
तन शिक्षा से ढकाना है।
मुझे इनका दामन सीने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
रचयिता
फ़राह हारून,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मढ़िया भांसी,
विकास खण्ड-सालारपुर,
जनपद-बदायूँ।
मुझे रहबर बनकर जीने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
मेरा काम तो पढ़ना-पढ़ाना है,
मेरा काम इल्म सिखलाना है।
मुझे प्यार है अपने शिष्यों से,
मुझे इनका मुस्तकबिल बनाना है।
मुझे ज्ञान की नय्या खेने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
मुझे न उलझाओ खातों में,
न डालो बेकार की बातों में।
मुझे प्यार बहुत है भारत से,
मुझे देश को आगे बढ़ाना है।
मुझे मेरे वजूद में जीने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
तुम न करवाओ जनगणना,
न करनी मुझको मतगणना।
मुझे करने दो बस मन गणना,
मुझे हर जन शिक्षित बनाना है।
मुझे बीज इल्म के बोने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
न एम डी एम का भार रहे,
न ड्रेस का कोई सार रहे।
ये बच्चे भूखे ज्ञान के हैं,
तन शिक्षा से ढकाना है।
मुझे इनका दामन सीने दो,
मैं शिक्षक हूँ मुझे शिक्षक ही रहने दो।
रचयिता
फ़राह हारून,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मढ़िया भांसी,
विकास खण्ड-सालारपुर,
जनपद-बदायूँ।

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